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जो लोग कढ़ाई में खाते हैं खाना , जान ले यह बातें नहीं तो पछताते रह जाएंगे

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आपने अक्सर लोगों को कहते हुए सुना होगा कि यदि कुंवारे लोग कढ़ाई में खाना खाते हैं, तो उनकी शादी में बारिश होती है। वहीं शादीशुदा लोगों के लिए कहा जाता है कि यदि वे कढ़ाई में खाना खाते हैं तो उनके जीवन आर्थिक तं-गी की समस्या उत्पन्न होती है। हमारे समाज में ऐसी कई मान्यताएं बनाई गई हैं। और सदियों से लोग उसमें उन मान्यताओं का पालन भी करते आये हैं। परंतु हम आपको बता दें कि सदियों पुरानी बनाई गई इन मान्यताओं के पीछे कुछ ना कुछ वैज्ञानिक वजह भी छुपे होते थे।

दरअसल हमारे समाज में लोग धार्मिक मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्यों की अपेक्षा ज्यादा महत्व देते हैं। यही वजह है कि जब हमारे पूर्वजों को लोगों को कुछ ऐसी बातें समझा नहीं होती थी जिसके पीछे कई वैज्ञानिक रहस्य छुपे होते थे, तब हमारे पूर्वज इसे किसी न किसी धार्मिक मान्यता से जोड़ देते थे, इसका फायदा यह होता था कि लोग आसानी पूर्वक इन मान्यताओं को मानने लगते थे और जो वैज्ञानिक रूप से लाभकारी साबित होता था।

कढ़ाई में खाना ना खाने वाली मान्यता के पीछे भी एक ऐसा ही वैज्ञानिक रहस्य छुपा हुआ था। इस वैज्ञानिक रहस्य को बहुत कम ही लोग जानते हैं। इस पोस्ट के जरिए हम आपको इसी पर वैज्ञानिक रहस्य से रूबरू कराने वाले हैं।

आइए जानते हैं कढ़ाई में खाना ना खाने के पीछे की वैज्ञानिक वजह क्या है-

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दरअसल कढ़ाई में खाना ना खाने के पीछे की जो वह वजह है, वह है हाइजीन। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि घर की महिलाएं या घर में खाना बनाने वाले कारीगर, घर के सभी सदस्यों को खाना खिलाने के बाद सबसे आखिर में खाना खाते हैं। अक्सर ऐसा देखने को मिल जाता है कि महिलाएं खाना खाने की जल्दबाजी में कढ़ाई में ही सब कुछ मिला कर खाना खा लेती हैं, और वह अलग से बर्तन में खाना परोसने की जहमत नहीं उठाती।

प्राचीन काल में भी ऐसे ही होता था। परंतु प्राचीन काल में बर्तन धोने के लिए तरह-तरह के उत्पाद नहीं हुआ करते थे। इसलिए प्राचीन काल में बर्तन धोने के लिए राख अथवा मिट्टी का प्रयोग किया जाता था। परंतु इसके प्रयोग से बर्तन धोने पर कढ़ाई के जूठे को ठीक से साफ नहीं किया जा सकता था। जिसकी वजह से हाइजीन की समस्या उत्पन्न होती थी।

अब यह अगर यदि यह बात सबको बताई जाती तो आधे लोगों को यह बात समझ आती और आधे लोगों को समझ में ना आती। इसलिए कुछ ऐसी मान्यता लागू करने के बारे में सोचा गया जिसका पालन सभी लोग कर सके। और फिर धर्म का सहारा लेते हुए यह मान्यता फैला दी गई की कढ़ाई में खाना खाने से बाद शादी में बारिश होगी। इसके बाद से ही यह मान्यता प्रचलित हो गई। और आज भी लोग इस मान्यता का पालन करते हैं।

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