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भाजपा इन चार विरोधी पार्टियों से रखेगी मधुर संबंध, वजह यह है

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लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में अपने संभावित सहयोगियों के साथ भी रिश्ते बेहतर कर रही है। भाजपा के संभावित सहयोगियों में उसकी नजर कांग्रेस से समान दूरी रखने वाले चार बड़े क्षेत्रीय दल अन्नाद्रमुक, बीजद, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस पर है। इन दलों के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए रुपरेखा तैयार किया जा रहा है।

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भाजपा का मानना है कि यह चार दल लगभग पचास सीटें लोकसभा सीटें जीतने की क्षमता रखते हैं। किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर नई सरकार के गठन में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इस वजह से भाजपा की नजर इन दलों के साथ चुनाव प्रचार में भी बेहतर रखने की बात कही जा रही है। पार्टी नेताओं को हिदायत है कि इन चार दलों पर ज्यादा आक्रामक टिप्पणी नहीं किया जाएं।

हालांकि भाजपा नेता अपने दम पर बहुमत के दावे तो कर रहे हैं, लेकिन चुनावों को लेकर अति आत्मविश्वास में नहीं रहना चाहते हैं। जिन राज्यों में वह कमजोर हैं वहां पर कांग्रेस से दूरी रखने वालों मजबूत क्षेत्रीय दलों के साथ रिश्ते बेहतर करने शुरू कर दिए हैं।

भाजपा नेतृत्व इन चार दलों को पूरे चुनाव में अधिक टारगेट करने की पूरी कोशिश करेगी ताकि लोकसभा चुनाव के परिणाम आने पर इन दलों के साथ हाथ मिलाया जा सके।

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