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रक्षाबंधन के इस पावन समय पर,भूल कर भी न करें ये गलतियां..

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रक्षाबंधन के इस पावन समय पर,भूल कर भी न करें ये गलतियां.. इस बार सावन माह में 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का संयोग एक साथ बन रहा है। इस बार बहनों को भाई की कलाई पर प्यार की डोर बांधने के लिए मुहूर्त का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस बार राखी बांधने के लिए काफी लंबा मुहूर्त मिलेगा।

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इस बार 19 साल बाद रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस एक साथ मनाया जाएगा। चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र का संयोग बहुत ख़ास रहेगा। सुबह से ही सिद्धि योग बनेगा जिसके चलते पर्व की महत्ता और अधिक बढ़ेगी। इसी दिन योगी अरविंद जयंती, मदर टेरेसा जयंती और संस्कृत दिवस भी मनाया जाएगा। * राखी बांधने का शुभ समय- सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शाम 5 बजकर 59 मिनट तक * राहुकाल में ना बांधे राखी- दोपहर 02:03 से 03:41 बजे तक ग्रहण और भद्रा से मुक्त रहेगा रक्षाबंधन- रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा भद्रा और ग्रहण से मुक्त ही मनाया जाता है। शास्त्रों में भद्रा रहित काल में ही राखी बांधने का प्रचलन है। भद्रा रहित काल में राखी बांधने से सौभाग्य में बढ़ोत्तरी होती है। इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा की नजर नहीं लगेगी। इसके अलावा इस बार श्रावण पूर्णिमा भी ग्रहण से मुक्त रहेगी जिससे यह पर्व का संयोग शुभ और सौभाग्यशाली रहेगा।

इस बार खास रक्षाबंधन- इस बार रक्षाबंधन का त्योहार गुरुवार के दिन पड़ेगा। ज्योतिष के अनुसार गुरुवार का दिन गुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार गुरु बृहस्पति ने देवराज इंद्र को दानवों पर विजय प्राप्ति के लिए इंद्र की पत्नी से रक्षासूत्र बांधने के लिए कहा था जिसके बाद इंद्र ने विजय प्राप्ति की थी। राखी का त्योहार गुरुवार के दिन आने से इसलिए इसका महत्व काफी बढ़ गया है।

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