जरूर पढ़ें :- आपने अपने आस-पास ऐसे कई सारे लोगों के देखा होगा जो अपने लाइफ का ज्यादा से ज्यादा टाइम सुस्त रहते हैं. ऐसे लोग अपने कामों में (जहाँ वो काम करने जाते है) वहां ज्यादा से ज्यादा टाइम सुस्त ही रहते हैं.

अब बात ये है की आखिर ऐसा क्यों होता है. आखिर ऐसा कौन सा कारण है. जिसकी वजह से कुछ लोग ज्यादा तर सुस्त रहते हैं. एक अध्‍ययन में पता किया गया कि ऐसे लोगों में अलजाइमर बीमारी होने का खतरा अधिकत रहता है. यह अध्‍ययन अमेरिका स्थित जॉन हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है.

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इस अध्‍ययन से पता चला की जो लोग दिन के समय में सुस्ती और नींद महसूस करते हैं. उन्हें एक भयानक बीमारी का खतरा हमेसा बना रहता है. क्योकि उन मे भूलने की बीमारी होने का खतरा तीन गुना ज्‍यादा होता है. जो सच में एक डराने वाली बात है. और यही नहीं इस अध्‍ययन में यह भी पता चला कि अगर आपको दिन में सुस्ती और नींद आती है. तो आप अलजाइमर्ज डिजीज (भूलने की बीमारी) का शिकार हो सकते हैं.

पर ये सिलसिला यहीं नहीं थमता, जानकारों ने और बारीकी से जाँच की और तकरीबन 10 साल तक इस अध्‍ययन के लिए कुछ उम्रदराज लोगों का परीक्षण किया. इसमें पता चला कि जिन लोगों को दिन के वक्त सुस्‍ती या आलस महसूस हो रहा था. उनमें अलजाइमर होने का खतरा तीन गुना अधिक था. ऐसे लोगों के दिमाग में बीटा अमायलॉइड नाम का एक प्रोटीन पाया गया. यह प्रोटीन अलजाइमर की बीमारी की पहचान है.

स्लीप जर्नल में प्रकाशित इस अध्‍ययन ने उन खबरों को पुख्ता कर दिया है. जिनमें अक्सर कहा जाता रहा है. कि कम नींद लेने या फिर सही ढंग से नहीं सोने की वजह से अलजाइमर जैसी परेशानी हो सकती है. जॉन हॉप्किन्स के ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में असोसिएट प्रफेसर एडम पी स्पाइरा ने कहा कि अगर कम नींद से अल्‍जाइमर्ज की बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है. तो फिर हम ऐसे मरीजों का इलाज कर सकते हैं. जिन्हें कम नींद आती है या फिर वो सुस्ती महसूस करते हैं.

यह बीमारी किस तरह के लोगों को ज्यादा होती है.

आलस के बारे में इतना कुछ जान कर कही न कही हमें ये सोचने पर मजबूर हो जाते है कि आखिर ये बीमारी किन-किन वर्ग के लोगों को ज्यादा होती है ?

मध्यम उम्र के व्यक्तियों में इस समस्या से ग्रस्त होने का खतरा ज्‍यादा रहता है. जो खुद के लिए जरा सा भी वक्त नहीं निकालते उनमें यह बीमारी ज्यादा पाई जाती है. स्पाइरा के मुताबिक अभी तक यह पता नहीं चल पाया है, कि दिन के वक्त उनींदा महसूस करने को बीटा अमायलॉइड प्रोटीन के जमा होने से जोड़कर क्यों देखा जा रहा है. एक संभावित कारण यह भी हो सकता है, कि दिन में सुस्‍ती महसूस करने की वजह से ही यह प्रोटीन दिमाग में बन जाता हो. इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता.

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