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चीन खुद में शासित ताइवान को उस पर दबाव के साथ उसे अपने में मिलाने की अक्सर धमकी देता रहता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अधिकारी एडमिरल फिलिप डेविडसन ने मंगलवार को कहा, मुझे चिंता है कि चीन अमेरिकी और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अमेरिकी की जगह लेने की अपनी इच्छा को पूरी करने की कोशिश में है। वो साल 2050 तक ऐसा कर सकता है।

अमेरिकी सीनेट की सैन्य सेवा समिति के सामने अमेरिकी कमांडर ने कहा, ऐसा लग रहा है कि उसकी पहली नजर ताइवान पर है। मुझे लगता है कि वह इसी दशक में अपने काम को अंजाम देगा। वास्तव में अगले छह साल में ही चीन ताइवान पर हमला कर सकता है।

अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ा रहा चीन

डेविडसन ने कहा कि चीन क्षेत्र में अपनी ताकती पूंजियों का दिन पर दिन विस्तार कर रहा है जिससे अमेरिका के लिए प्रतिकूल हालात बना रहे हैं और हमारा प्रतिरोध का स्तर भी कमजोर पड़ रहा है। हम इस खतरे को लगातार बढ़ने दे रहे हैं जिसकी वजह से चीन उसी स्थति में एक तरफा रूप से बदल सकता है। हमारी सेना जब तक उसे जवाब देगा वह अपने काम को अंजाम दे चुका होगा। अमेरिकी कमांडर ने कहा, चीन हमले के इरादे से ही क्षेत्र में साजो-सामान इकठ्ठा कर रहा है वरना इसका कोई और मतलब नहीं हो सकता है.

ताइवान का आधिकारिक नाम ‘द रिपब्लिक ऑफ चाइना’ है. साल 1949 में गृहयुद्ध के अंत में राष्ट्रवादी नेता कोमिंगतांग मुख्यभूमि (चीन) भाग गए जिसके बाद ताइवान की स्थापना हुई. बीजिंग की चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी का ताइवान पर कभी शासन नहीं रहा है लेकिन वो इसे अपना ही हिस्सा मानता है। चीन का ये भी कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वो इसे सैनिकों की ताकत के द्वारा हमला कर उसे वापस ले लेगा। वहीं, ताइवान की सरकार और इसकी ज्यादातर आबादी इस दावे को खारिज करती है कि वो चीन का हिस्सा हैं। 2016 में साइ इंग-वेग का शासन होने के बाद इन दोनों देशों के बीच तनाब बढ़ गया है।

राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में ही ताइवान को हथियारों की बिक्री बढ़ा दी गई थी और अमेरिका के कई शीर्ष राजनयिकों ने भी यहां का दौरा किया।  चीन ने इसकी अमेरिका के इस कार्य की चीन ने हमेशा पलटवार किया,साथ ही धमकी भी दी। ताइवान की खाड़ी के नजदीक अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दीं।

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