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हमेशा की तरह पाकिस्तान ने बैठक में भारत को बदनाम करने की कोशिश की और जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया जिस पर प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने पाकिस्तान को आड़े हाथ लिया। भारत की बारी आने पर मैत्रा ने कहा, मैं पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा दिए गए बयान को लेकर जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करती हूं।हमारे प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद थी कि आज संयुक्त राष्ट्र ने एक मील का पत्थर हासिल किया है और इस सादर स्मरण के दौरान एक बार फिर महासभा में उन आधारहीन झूठों को दोहराया जाएगा, जो पाकिस्तान द्वारा ऐसे मंचों पर लगातार उठाया जाता रहा है। ये बातें अब पाकिस्तान का ट्रेडमार्क बन चुकी हैं।

मैत्रा ने आगे कहा, पाकिस्तान के प्रतिनिधि के द्वारा जो कहा गया, वह भारत के आंतरिक मामलों के बारे में पाकिस्तानी प्रतिनिधि द्वारा कभी न खत्म होने वाली मनगढ़ंत कहानियां है। हम जम्मू और कश्मीर के लिए दुर्भावनापूर्ण संदर्भ को अस्वीकार करते हैं, जो भारत का अभिन्न अंग है। अगर कोई ऐसा आइटम है जो संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में अधूरा है, तो वह आतंकवाद के संकट से निपटना है।

पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जो आतंकवाद को लेकर विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र है। इस्लामाबाद खुद ही आतंकवादियों को प्रशिक्षित करता है और उन्हें शहीद के रूप में मान्यता देता है। इसके अलावा पाकिस्तान अपने देश में लगातार जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताता है।

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