आप ही बताएं.. मैं एक पढ़ी लिखी चेन्नई की ब्राह्मण परिवार में बड़ी हुई.मैं बचपन से ही डॉक्टरों की तरफ आकर्षित होती गई हूँ. यहाँ तक की एक ऐसा समय भी था जब मैं किसी डॉक्टर से ही शादी भी करना चाहती थी. जब मेरे लिए मेरे परिवार के पास रिश्ते आने शुरू हुए, मैं हमेशा यही मनाती थी की काश उनमे से कुछ तो हैंडसम डॉक्टर भी हों. मगर मेरी बदकिस्मती देखिये की डॉक्टर के एक तो कोई रिश्ते नहीं आते थे और अगर गलती से कोई आ गए तो देखने में बिलकुल मेरे मन लायक नहीं होते थे.

तो इसलिए मुंबई में रहने वाले एक सीए लड़के से मेरी शादी हो गई. मेरे पति हमेशा अव्वल आने वाले शहर के सबसे नामी गिरामी सीए में से एक है. मैंने सुना है की वो बहुत ही धूर्त व्यवसाक हैं और बहुत मेहनती भी. जब दुसरे लोगों से उनकी तारीफें सुनती हूँ, तो मन बहुत खुश हो जाता है.
मेरे दो बेटे हैं. अक्सर पति तीन चार हफ़्तों के लिए काम के सिलसिले में शहर के बाहर ही रहते हैं. तो हर दो महीनों में वो तीन चार हफ़्तों के लिए हमारे साथ नहीं होते हैं.

हाल ही में मेरी सबसे प्रिय सहेली का पति अनुज चेन्नई से मुंबई आ गया है. वो एक डॉक्टर है और उसकी नौकरी शहर के एक बहुत ही नामी हस्पताल में एक सीनियर पोस्ट पर लगी है. डॉक्टर होने के साथ साथ वो बहुत हैंडसम और सलीकेदार भी है और उसकी बातें भी बहुत लुभावनी होती हैं. और इन सब के अलावा वो मेरी बातें बहुत ध्यान से सुनता है.

उसके आस पास मैं खुद को बहुत सहज महसूस करती हूँ. मेरी सहेली और उसकी पत्नी अरुणा उसके साथ मुंबई नहीं आ पाई क्योंकि वो हैदराबाद के एक आईटी कंपनी में सीनियर पोस्ट पर है तो वो दोनों ही एक दुसरे से मिलने के लिए मुंबई और हैदराबाद के बीच चक्कर लगाते रहते हैं. पिछले कुछ महीनो से मैं अनुज को बहुत पसंद करने लगी हूँ. ये आकर्षण दोनों ही तरफ से है. वो मुंबई में एक फ्लैट में रहता है और ज़रूर अकेलापन महसूस करता होगा, तभी तो अक्सर सप्ताहांत हमारे घर आ जाता है.

मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ, मगर इसके बावजूद में अनुज की तरफ शारीरिक तौर पर खींची चली जा रही हूँ. यूँ तो अनुज तब भी बड़े आराम से हमारे घर आता है जब मेरे पति मौजूद होते हैं, मगर वो उनकी अनुपस्तिथि में और भी बेबाक लगता है.

मुझे अपने पति की गैरमौजूदगी में उसकी उपस्तिथि और उससे बातें करना अच्छा लगता है. अब मुश्किल ये है की न तो मेरे पति को और न ही अरुणा को ये पता है की वो मेरे पति के पीछे भी हमारे यहाँ आता है.

कभी कभी मुझे बहुत अपराधबोध महसूस होता है. मुझे ये भी डर है की अगर ये बात फ़ैल गई तो लोग इसे विवाहेतर सम्बन्ध का नाम दे देंगे. मगर असल में ये एक ऐसा रिश्ता है जिसमे मैं अपने पति से ज़्यादा किसी और पुरुष के संपर्क में खुद को सहज महसूस करती हूँ. अगर कोई मुझसे पूछे की मैं इसे इतना छिपा क्यों रही हूँ तो मेरे पास कोई जवाब नहीं होगा.

मुझे ये भी लगता है की अनुज के साथ मेरी शारीरिक अंतरणगता गलत नहीं है. समाज इस बात को इतना तूल क्यों देती है? काश ये भी सबको एक सामान्य सी प्रक्रिया लगती, जैसे वाशरूम जाना या नहाना. है तो सच में ये इतनी ही सरल सी बात.

मेरे ख्याल से हम दोनों ही अपने साथियों की मौजूदगी में किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकते. वो तो उनकी अनुपस्तिथि के कारण हम दोनों एक दुसरे के करीब रहते हैं. मैं और अनुज दोनों ही हमारे जीवनसाथिओं को पूरा मान देते हैं. काश हम बता पाते की मैं और अनुज एक दुसरे के लिए क्या हैं. हम दोनों ही निजी तौर पर कितने बेहतर हुए है, और इसका श्रेय हमारे इस सम्बन्ध को ही जाता है.

अनुज कहता है की अब वो अपनी पत्नी को पहले से कहीं बेहतर समझने लगा है. मैं भी अपने अकेलेपन और फ़्रस्ट्रेशन से बाहर निकलने में सफल हुई हूँ. इसका नतीजा ये है की अब मेरे पति से झगडे भी कम होते हैं. अब हम दोनों बैठ कर तसल्ली से बातें कर पाते हैं. यहाँ तक की अब मैं अपने पति से उसके काम के बारे में भी बातें करती हूँ, जो मैं पहले कभी नहीं करती थी.

अनुज से मेरे रिश्ते के बाद अब मैं पहले से कहीं ज़्यादा सहनशील हो गई हूँ और अपने पति को स्वीकार करने में मुझे अब कोई दिक्कत नहीं होती है.

मैं और अनुज दोनों ही अपने जीवनसाथियों के साथ हमारे बेहतर रिश्ते को महसूस करते हैं.

मैं ये नहीं कह रही हूँ की सभी को आगे बढ़कर अफेयर करना चाहिए. मगर हाँ, मैं ये ज़रूर कह रही हूँ की हमारे समाज को सभी लोगों को और ऐसे रिश्तों के एक ही चश्मे से देखना बंद कर देना चाहिए.

शादी के कई वचन होते हैं और जब दुसरे वचनों को दम्पति तोड़ देते हैं तब तो समाज उन्हें इतनी क्रूर नज़रों से नहीं देखता फिर विवाहेतर सम्बन्ध ही क्यों ऐसे देखता है.

क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि इसमें शारीरिक सम्बन्ध है?

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