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अमेरिका के प्रमुख वित्तीय संस्थान सिटी बैंक ने भारत समेत दुनिया के 13 देशों से बोरिया बिस्तर समेटने का फैसला किया है। सिटी बैंक ने भारत के उपभोक्ता बैंकिग कारोबार से बाहर निकलने की घोषणा गुरुवार को कर दी। बैंक ने यह कदम अंतर्राष्ट्रीय रणनीति के तहत उठाया है। बैंक के इस कारोबार में क्रेडिट कार्ड, खुदरा बैंकिंग, आवास ऋण और संपत्ति प्रबंधन आदि भी शामिल हैं। सिटी बैंक के इस कदम के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर अब बैंक के कर्मचारियों का क्या होगा।

बता दें कि दुनिया में भर में फैले अमेरिका के प्रमुख वित्तीय संस्थान सिटी बैंक की भारत में कुल 35 शाखाएं हैं। वहीं उपभोक्ता बैंकिंग कारोबार के जरिये इस बैंक से करीब चार हजार कर्मचारी जुड़े हैं। सिटी बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आशु खुल्लर ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि बैंक के इस फैसले का भारत में बैंक के ऑपरेशंस और बैंक के कर्मचारियों पर कोई असर नहीं होगा यानी बैंक के सभी कर्मचारी पहले की तरह ही काम करते रहेंगे और बैंक भी अपने सभी क्लाइंट को पहले की तरह ही सेवाएं देता रहेगा। हालांकि अभी तो इस बैंक के कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित है लेकिन क्या आने वाले समय में भी सुरक्षित रहेगी। यह कह पाना मुश्किल है।

खरीदार की तलाश

सिटी बैंक ने कहा है कि वह भारत में बैंक के ऑपरेशंस के लिए एक खरीदार की तलाश कर रहा है। वहीं बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने बैंक भारत से बाहर जाने की मुख्य वजह मनीकंट्रोल बताया है। उनका कहना है कि बैंक भारत में उपभोक्ता बिजनेस को बंद कर रहा है। ऐसे में बैंक के भारत से बाहर जाने के फैसले जा असर ना तो बैंक के स्टाफ पर पड़ेगा, ना ही बैंक के ग्राहकों पर।

सेवाएं होंगी ज्यादा मजबूत

सिटी इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव ने बताया कि हमारे ऑपरेशंस में तत्काल कोई बदलाव नहीं आया है। ऐसे में इस घोषणा से हमारे साथ काम कर रहे लोगों पर तत्काल कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा हम अपने ग्राहकों की समान भाव से सेवा करते रहेंगे और आज की घोषणा से बैंक की सेवाएं और भी ज्यादा मजबूत होंगी। संस्थागत बैंकिंग कारोबार के अतिरिक्त सिटीबैंक अपने मुंबई, पुणे, बेंगलुरू, चेन्नई और गुरुग्राम केंद्रों से वैश्विक कारोबार पर ध्यान देता रहेगा।

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