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गौतम बुद्ध को आखिर कौन नही जानता,गौतम बुद्ध को भगवान श्रीहरि का अवतार माना जाना है। इनका नाम सिद्धार्थ था, इनका जन्म 563 ईसा पूर्व लुम्बिनी नामक स्थान में हुआ था। इनका अवतरण इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय शाक्य कुल में राजा शुद्धोधन के घर में हुआ ।महाराज शुद्धोधन गौतम बुद्ध के पिता थे। गौतम बुद्ध का राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में कभी भी जीवन के दुखों से सामना नही हुआ था। और जब इन्हे जीवन और इस संसार की नश्वरता का भान हुआ तो यह अपना सब त्याग कर बुद्ध बन गए ।

एक बार भगवान गौतम बुद्ध किसी गाँव में एक धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान लोग महात्मा बुद्ध के पास अपनी परेशानियों के हल पाने के लिए भी आते थे।लोग बहुत ही दुखी मन से आते थे और शिविर के बाहर मुस्कुराते हुए निकलते थे। सड़क पर बैठा एक निर्धन व्यक्ति कई दिनों से इस बात को बहुत ध्यान से देख रहा था कि,भगवान बुद्ध के उपदेश शिवीरी के अंदर लोग जाते समय दुखी होते हैं,और बाहर आते हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कान होती है।

वह यह देख कर बहुत आश्यर्च करता था। एक दिन उसने सोचा कि वो भी अपनी परेशानी लेकर महात्मा बुद्ध के पास जाएगा। अगले दिन वो गरीब व्यक्ति भी महात्मा बुद्ध के पास गया। उसने गौतम बुद्ध को प्रणाम किया और फिर अपनी समस्या उनके सामने रख दी। उसने कहा इस गाँव मे सभी सुखी हैं सभी समृद्ध हैं, अकेला मैं ही निर्धन क्यों हूँ?

उसकी यह बात सुन कर बुद्ध मुस्कुरा कर बोले, तुम्हारे निर्धन होने का कारण तुम हो, क्योंकि आज तक कभी भी तुमने किसी को कुछ भी दान नही दिया यही कारण है कि तुम गरीब हो। इस पर वह निर्धन व्यक्ति अचंभित होते हुए बोला महात्मन मैं एक गरीब भला मेरे पास किसी और को देना के लिए क्या है। बुद्ध ने उसकी बात सुनी और उसे सबसे बड़ा अज्ञानी कहा। बुद्ध उस से कहा औरों के देने के लिए तुम्हें भगवान ने कई चीजें दी हैं। मुस्कान दी है जिससे तुम लोगों में उम्मीद जगा सकते हो।मुख दिया है इससे मीठे शब्द बोल सकते को दो हाथ भब्बी दिए हैं किसी की सहायता कर सकते हो, जिस भी व्यक्ति के पास यह चीजें है वह निर्धन कैसे हो सकता। निर्धनता केवल एक सोच है उससे अधिक और कुछ नही।

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