स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से छह अप्रैल और तीस अप्रैल को जारी आंकड़ों में यह फर्क साफ नजर आता है कि छह अप्रैल को कुल मौतों में 86 फीसदी मौत ऐसे लोगों की हुई हैं जो पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त थे। इनमें गुर्दे, दिल, मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि शामिल हैं। यानी महज 14% कोरोना मौत ही ऐसी थीं जो किसी बीमारी से ग्रस्त नहीं थे।

वहीं अब हालिया रिपोर्ट में 30 अप्रैल को जारी आंकड़े के अनुसार कोरोना मौत में अन्य बीमारी से ग्रस्त लोगों की संख्या 78 फीसदी दर्ज की गई। यानी एक महीने से भी कम समय में इसमें आठ फीसदी का बदलाव दर्ज किया गया। कोरोना मौतों में ऐसे लोगों की संख्या बढ़कर 22 फीसदी हो गई जो पहले से किसी अन्य बीमारी से पीडित नहीं थे।

ऐसे में ये एक चिंता का विषय है चूंकि कोरोना वायरस पहले तो ऐसा देखा गया था कि जो लोग किसी बीमारी से पीड़ित है उनपर ही ज्यादा हावी हो रहा था, लेकिन 30 अप्रेल की इस रिपोर्ट में जो देखा गया वाकई हैरान कर देने वाला है. इनमें से अधिकतर मौतें का आंकड़ा 78 फीसदी है जो पहले किसी बीमारी से ग्रस्त नहीं थे।

अधिक उम्र वालों की मौत का प्रतिशत घट गया-

तब मृतकों में 63% लोग 60 वर्ष से ज्यादा के थे। 37%मौत 60 वर्ष से कम आयु वर्ग की थीं। 60 से कम उम्र की मौतों का आंकड़ा 49 और अधिक का प्रतिशत 51% रह गया।

मौत में महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 35 हुआ-

मौत में पहले पुरुषों का प्रतिशत 73 और महिलाओं का 27 था लेकिन अब इसमें भी बदलाव आया है। अब मरने वालों में 65 फीसदी पुरुष एवं 35 फीसदी महिलाएं हैं।

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