बता दें कि साल 2003 में जब सार्स महामारी फैली थी तब भी अचानक वायरस के जेनेटिक मैटरियल गायब हो गया था जिसकी वजह से महामारी धीरे-धीरे खत्म हो गई थी। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, वायरस में साइंटिस्ट्स को जो नए बदलाव देखने को मिल रहे है उससे यह भी संकेत मिलता है कि इंसानोंमें वायरस संक्रमण धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है लेकिन अब इस जानकारी को पुख्ता करने के लिए बाकी कई जगहों पर सैंपल की जांच करने की जरूरत है।

वहीं, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के सिसर्चर्स का मानना है कि अगर बड़े पैमानी पर वायरस का Genome Sequencing किया जाए तो ऐसे परिणाम और जगहों से भी मिल सकते हैं। बता दें कि दुनिया में कोरोना वायरस बढ़ी तेजी से फैल रहा है। इस वायरस की चपेट में अब तक 36 लाख से ज्यादा लोग आ चुके है। जिसमें से 2 लाख 51 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। अमेरिका इस वायरस का केंद्र बन चुका है। अकेले अमेरिका में अब तक 11 लाख 80 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके है। वही 68 हजार 900 से अधिक लोगों की मौत हो गई है।

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