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दरसअल जांच के दौरान दरोगा के खाते में अवैध रूप से 49.69 लाख कहां से आए इस कमाई का हिसाब नहीं दे सके। खबरों के मुताबिक दरोगा का वेतन लगभग 50 हजार रुपये था। दरोगा के इस काली कमाई का खुलासा मीडिया में आने के बाद हुआ। मीडिया में खबर छपने के बाद तत्कालीन आईजी रमित शर्मा ने जांच रिपोर्ट के आधार पर एंटी करप्शन ने जांच कराने की सिफ़ारिश की थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीते वर्ष 2017 में अरविंद कुमार त्रिवेदी घूरपुर थाने के थानेदार थे। इस बीच प्रयागराज एसएसपी के तत्कालीन स्टेनो का एक ऑडियो सोशलमीडिया पर वायरल हुआ जिसे जिसे मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

वायरल ऑडियो में थाना दिलाने को लेकर बातचीत चल रही थी। इस खबर के प्रकाशित होते ही तत्कालीन आईजी रमित शर्मा ने प्रतापगढ़ एसपी रहे शगुन गौतम को जांच दे दिया। एसपी शगुन गौतम ने स्टेनो, घूरपुर एसओ और हंडिया इंस्पेक्टर को बुलाकर बयान दर्ज किया। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर आईजी रमित शर्मा ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से एंटी करप्शन से जांच करने के लिए सिफारिश की थी। आईजी की रिपोर्ट पर एंटी करप्शन टीम ने जांच शुरू की। जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ी करवाई घूरपुर में एसओ रहे अरविंद त्रिवेदी पर ही हुई है। एंटी करप्शन की जांच में पता चला दरोगा अरविंद त्रिवेदी ने 2006 से 2017 तक अपनी आय की संपत्ति में वेतन, बैंक ऋण और ब्याज मिलाकर कुल 53 लाख की इनकम थी।

जब एंटी करप्शन ने दरोगा के खिलाफ जांच शुरू की तो उनके विभिन्न खातों में जमा रुपया, रायबरेली में जमीन, मकान निर्माण में खर्च, महंगी बाइक, लग्जरी कार , महंगा मोबाइल फोन, विभिन्न बैंक खातों में जमा रुपया, बीमा का प्रीमियम, सोने की अंगूठी, बच्चों के शिक्षा आदि का हिसाब लेने पर पता चला दरोगा ने आय से 49 लाख 69 हजार 132 रुपया अधिक की कमाई की थी। इस अवैध कमाई का वह हिसाब नहीं दे सके। इसी आधार पर एंटी करप्शन ने घूरपुर थाने में ही पूर्व थानेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया। आरोपी दरोगा की वर्तमान में बांदा जिले में तैनाती है। पुलिस सूत्रों की मानें तो भ्रष्टाचार की जांच के दौरान कई पुलिसकर्मियों की कलई खुल सकती है।

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