चपरासी की बेटी … महामारी पूरी दुनिया में फैल चुकी है ऐसे में सरकार हर कोशिश कर रही है कि कोरोना वायरस से कैसे लड़ा जाए ताकि हर व्यक्ति सुरक्षित रहे और कोरोना वायरस के चपेट में ना आए इसके लिए सरकार ने लॉकडाउन लागू किया था लॉकडाउन लगाने के बाद काफी फायदे है देखने को मिला था हर दिन जो आकड़ें सामने आ रहे हैं उन्हें देखकर सरकार की तो चिंता बढ़ी ही है लेकिन, आम नागरिक भी परेशान है. क्योंकि, लोगों के मन में कोरोना का डर इस तरह बैठ गया है कि, घरों से निकलना बंद कर चुके हैं. बीते 24 घंटों में देश में रिकॉर्डतोड़ आकंड़ें सामने आए हैं. जी हां, 11,458 नए कोरोना के मामले सामने आए हैं. जबकि, 24 घंटों के भीतर 386 संक्रमित मरीजों की मौत हुई है इस तरह कुल मरने वालों की संख्या 8800 हो चुकी है.

एक चपरासी की बेटी ने महज अपने दम पर इतनी अल्प आयु में  उस मुकाम की तस्वीर अपने इन आंखों से देखी, जिसे लोग ताउम्र भी नहीं देख पाते हैं। उसे इस बच्ची ने महज 15 साल की उम्र में देख लिया है। 10 वीं की कक्षा में 94 फीसद अंकों के साथ उत्तीर्ण करने वाली इस बच्ची की प्रतिभा से एसडीएम साहब इतने मुरीद हो गए कि इस नन्हीं सी बच्ची को एक दिन उन्होंने अपनी कुर्सी सौंप दी। अपना पूरा कार्यभार सौंप दिया। अपनी सारी शक्ति उस छोटी सी बच्ची को दी।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा की रहने वाली 15 वर्षीय इस बच्ची की प्रतिभा का अंदाजा आप इसी से लगा सकते है कि अभी इसकी चर्चा चौतरफा हो रही है। वहीं इस बच्ची ने कहा कि उसका शुरू से ही सपना है कि वो इस कुर्सी पर बैठे और एसडीएम साहब ने मुझे यह तोहफा दिया है और मैं भविष्य में जीजान लगाकर मेहनत करूंगी कि मैं इस कुर्सी पर बैठ सकूं। मैं आईएएस अफसर बन सकूं। मैं अपने इन सपनों को मुकम्मल करके ही दम लूंगी। यकीनन इस छोटी-सी बच्ची की इस संकल्पबद्धता को देख दिल बाग-बाग हो जाता है।

यह मालूम पड़ा कि उनके चपरासी की बेटी 10वीं में 94 फीसद अंकों के साथ उत्तीर्ण हुई है तो उनका दिल बाग-बाग हो गया और फिर उन्होंने इस बच्ची को एक दिन के लिए एसडीएम बनाने का फैसला किया।

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