चाणक्य के अनुसार छात्रों को यह काम कभी नहीं करने चाहिए … बच्चे ही देश का फ्यूचर होते हैं, आप जैसे उन्हें पाल पोस कर बड़ा करेंगे वे आगे चलकर वैसा ही देश का निर्माण करेंगे। जब बच्चे छोटे होते हैं तो अपने आसपास का माहौल देख कर ही चीज़े सीखते हैं और वैसे ही समाज के बीच बर्ताव करते हैं और कैसे उनका पालन पोषण हुआ है इसका परिचय देते हैं। लेकिन अफ़सोस की बात तो यह है क आजकल के माँ बाप के पास न तो अपने बच्चो में अच्छी सांसारिक शिक्षा देने का समय है और न ही खुद इन सब चीज़ों के बारे में जानकारी रखते हैं।
चाणक्य के बारे में सबने सुना ही होगा, चाणक्य की कही हुई बातें अगर कोई कंठस्थ कर ले तो अपने जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकता है। वैसे तो चाणक्य ने बहुत सी चीज़ों के बारे में बताया है लेकिन आज हम सिर्फ बच्चो के लिए बताई गयी बातों पर प्रकाश डालेंगे।
देखिये चाणक्य कहते हैं अगर बच्चे विद्यार्थी इन कामो से दूर रहे तो अपने जीवन में अच्छे प्रभाव शाली चरित्र वाले इंसान बन सकते हैं, आइये जानते हैं:-

कामवासना:
छात्रों को कामवासना से दूर रहना चाहिए क्यूंकि अगर छात्र लगातार ऐसा करते हैं तो उनका मन पढ़ने में नहीं लगता है और वे प्रतिस्पर्धा में पीछे होने लगते हैं। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखें।
क्रोध:-
चाणक्य बताते हैं के गुस्सा इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन होता है, अगर आप गुस्से में हैं तो सबसे पहले आप खुद का नुकसान करेंगे। जब इंसान क्रोध में होता है तो उसके सोचने समझने की शक्ति ख़तम हो जाती है।
लालच:-
कभी छात्र में लालच की भावना नहीं पनपनी चाहिए, क्युकी लालच में इंसान वो सभी गलत काम करने की कोशिश करता है जो उसे खतरे में डाल सकता है, इसलिए जो है आपके पास है उससे संतुष्ट रहें और आगे बढ़ने के लिए म्हणत करते रहें।

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