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चाणक्य नीति के मुताबिक दोस्ती सभ्य व्यक्तियों से करनी चाहिए। सभ्य आदमी अपनी मर्यादा को समझता है। इसलिए वह कभी अपने दायरे से आगे जाने की कोशिश नहीं करता है। जो व्यक्ति पीठ पीछे बात इधर से उधर करते करते हों ऐसे लोगों से दोस्ती कभी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि जो दोस्त आज आपके साथ किसी और की बुराई कर सकते हैं वही किसी दिन किसी और से आपकी भी बुराई करेंगे। ऐसा करना उनकी फितरत होती है।

इसी तरह झूठे व्यक्ति को भी कभी अपना मित्र नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि जो व्यक्ति झूठा होता है वह अपनी बात सच साबित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। झूठा व्यक्ति संसार में कभी किसी का सगा नहीं हो सकता। दोस्ती हमेशा ईमानदार व्यक्ति से करनी चाहिए। ईमानदार व्यक्ति का स्वभाव होता है कि उससे किसी को कष्ट न हो, इसलिए वह कभी किसी को धोखा नहीं देता। दोस्तों से हम अक्सर अपने घर-परिवार का सुख-दुख सब साझा करते हैं। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि आपकी तरह आपका दोस्त भी दोस्ती के लिए उतना ही समर्पित हों। वहीं गलत संगति में पड़े लोगों को भूलकर भी अपना मित्र न बनाएं। क्योंकि व्यक्ति पर संगत का असर पड़ता है, वह जैसे लोगों का संगत में रहता है खुद को भी उसी रंग में रंग लेता है।

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