रिपोर्ट की मानें तो चीन अब तक दूसरे देशों की 41 लाख वर्ग किलोमीटर भूमि अपने कब्जे में ले चुका है यह मौजूदा चीन का 43 प्रतिशत हिस्सा है। मतलब ड्रैगन ने अपनी विस्तारवादी नीति से बीते 6-7 दशकों में चीन का फैलाव वास्तविकता से लगभग दोगुना कर लिया है। लेकिन उसकी लालच खत्म होने की जगह बढ़ती जा रही है। आइए उसके कुछ अवैध कब्जे के बारे में जानते हैं।

भारत

चीन ने धीरे—धीरे करके भारत के 38 हजार वर्ग किमी पर अपना कब्जा जमा रखा है। इसमें 14,380 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अक्साई चिन का शामिल है। वहीं पीओके का 5180 वर्ग किमी इलाका पाक ने चीन को दिया।

ईस्ट तुर्किस्तान

ईस्ट तुर्किस्तान 16.55 लाख वर्ग किमी का भूभाग है। चीन ने 1934 में पहले हमले के बाद 1949 तक ईस्ट तुर्किस्तान पर कब्जा कर लिया। चीन 45 प्रतिशत आबादी वाले उइघुर मुस्लिमों के इस इलाके पर जुल्म ढा रहा है।

तिब्बत

12.3 लाख वर्ग किमी वाले इस प्राकृतिक देश तिब्बत पर चीन ने 7 अक्टूबर, 1950 को कब्जा जमा लिया। वह 80 प्रतिशत बौद्ध आबादी वाले तिब्बत पर हमला कर अपनी सीमा का विस्तार करते हुए भारत तक पहुंच गया।

इनर मंगोलिया

चीन ने अक्टूबर 1945 में 11.83 लाख वर्ग किमी भूभाग वाले इनर मंगोलिया पर हमला कर अपना कब्जा जमा लिया। 13 फीसदी आबादी वाले मंगोलों की आजादी की मांग को बुरी तरह कुचल कर शांत कर दिया गया।

ताइवान

समुद्रों से चारों तरफ से घिरे 35 हजार वर्ग किमी वाले ताइवान पर काफी समय से चीन की नजर टिकी हुई है। कम्युनिस्टों की जीत के बाद 1949 में राष्ट्रवादियों ने ताइवान में शरण ली। चीन तभी से इसे अपना हिस्सा मानता है, लेकिन ताइवान डटकर चीन के सामने खड़ा है।

हांगकांग

1997 में चीन ने हांगकांग पर जबरन अपना कब्जा जमा लिया। इस समय वह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर हांगकांग पर अपना अधिपत्य जमाने में लगा है।

मकाउ

पुर्तगालियों ने 1999 में 450 वर्ष के शासन के बाद चीन को मकाउ सौंप दिया था।

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