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सैन्य सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि दौलत बेग ओल्डी में भारत का आखिरी आउटपोस्ट 16 हजार फीट की ऊंचाई पर है, जो काराकोरम पास के दक्षिण में और चिप-चाप नदी के किनारे है। यह गलवान श्योक संगम के उत्तर में स्थित है। दरबुक-श्योक-डीबीओ रोड पर कई पुल ऐसे हैं जो 46 टन वजन वाले T-90 टैंक्स का भार नहीं झेल सकते हैं।

वहीं भारतीय सेना ने गलवान घाटी हिंसा से सबक लेते हुए विशेष उपकरणों के जरिए इन्हें नदी-नालों के पार पहुंचाया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलिंग पॉइंट्स 14, 15, 16, 17 और पैंगोंग त्सो फिंगर इलाके में चीन की बढ़ती हरकत के बाद सेना ने आर्मर्ड पर्सनल कैरियर्स (एपीसीएस) या इन्फेंटरी कॉम्बैट वीइकल्स (पैदल सेना का मुकाबला करने वाले वाहन), M777 155एमएम होवित्जर और 130एमएम गन्स को पहले ही डीबीओ पहुंचा दिया था।

सैन्य सूत्रों के अनुसार इस गर्मी पीएलए की आक्रामकता का मुख्य उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में 1147 किमी लंबी सीमा पर भारतीय सेना के साथ संघर्ष वाले इलाकों को खाली करना था, जिससे वह 1960 के नक्शे को लागू कराने का दावा कर सके। लेकिन चीनी सैनिकों की इस कोशिश को 16 बिहार रेजिमेंट के जवानों ने 15 जून को विफल कर दिया।

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