जानकारी के अनुसार सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के साथ विवाद और न बढ़े इसलिए भारतीय सेना ने चीन के जवानों को छोड़ दिया था। लेकिन इस दौरान चीन सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के अधिकारी को तब तक नहीं रिहा किया गया, जब तक कि चीन ने गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पेट्रोलिंग पॉइंट 14 से पीछे हटने और भारतीय सैनिकों को सुरक्षित लौटाने पर सहमति नहीं दी। सेना के मुताबिक एलएसी पर चीन ने एक ऑब्जर्वेशन पोस्ट बनाई थी। जिसे दोनों सेना के बीच हुई चर्चा के बाद हटा लिया गया था। इसके बाद 14 जून को चीन ने फिर से एक और ऑब्जर्वेशन पोस्ट बना लिया। इसी का विरोध दर्ज कराने के लिए कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू सैनिकों के साथ वहां गए थे।

इसी दौरान चीन की सेना की तरफ से कर्नल संतोष बाबू को धक्का मार दिया गया, जिसके बाद से झड़प शुरू हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती स्थिति में भारतीय सैनिकों की संख्या ज्यादा थी। लेकिन बाद में पीछे से और चीनी सैनिक आ गए। इसके बाद भारतीय सेना ने मदद के लिए करीबी इलाके में तैनात तोपची टुकड़ियों के जवान को बुला लिया। दोनों देशों की सेनाओं के बीच यह संघर्ष कई घंटों तक चला।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here