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केंद्र सरकार 31 जनवरी को बजट पेश कर सकती है। इस बार बजट में सरकार में सरकार का पूरा फोकस जन-धन खातों पर हैं। बताया जा रहा है कि, इन खातों के लिए डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के साथ सुकन्या समृद्धि योजनाओं और अटल पेंशन योजना से भी जोड़ने का ऐलान सरकार आगमी बजट में कर सकती है। सरकार जन-धन की सेवाओं में तीसरी बार विस्तार करने जा रही है, जिसके बाद ग्राहकों को डोर स्टेप बैंकिंग सुविधा के साथ डिजिटल खाता धारकों जैसी सुविधाओं से भी जोड़ने का काम किया जाएगा। इन खाता धारकों को मोबाइल बैंकिंग की सुविधा भी मिलेगी।

सरकार द्वारा अटल पेंशन योजना और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी अन्य योजनाओं को जन-धन खातों से जोड़ने की तैयारी पुरी कर ली गई है, जिसके बाद इन खातों से इन योजनाओं की राशि जमा की जा सकेगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 44.44 करोड़ जन-धन खाते देश में अब तक खुल चुके हैं। इन खातों में 1.57 लाख करोड़ रुपए जमा हैं। ज्यादातर जन-धन खाते सरकारी बैंकों में खोले गए हैं।

केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा 2014 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। सरकार की कोशिश थी कि, देश के सभी नागरिकों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा जाये। पीएम जन-धन योजना से जुड़े खातों में न्यूनतम राशि रखने की जरूरत नहीं होती है। यानी आपका खाता शून्य पर आसानी से खुल जाता है। इन खाता धारकों को रूपे डेबिट कार्ड जारी किया जाता है।

बचत करने की आदत बढ़ी
जन-धन खाता धारकों को 2 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा भी मिलता है। इसके साथ ही दस हजार रुपए के ओवरड्रफ्ट की सुविधा भी मिलती है। बताया जा रहा है कि, इन खातों के खुलने के बाद लोगों में बचत की आदत बढ़ी है। पिछले साल अगस्त माह में योजना के 7 साल पूरे हो गए हैं। सरकार द्वारा बताया गया है कि, औसतन प्रति जन-धन खाता 3398 रुपए जमा हैं। 55 प्रतिशत जन-धन खाताधारक महिलाएं हैं और 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी इलाकों में हैं।

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