जलवायु परिवर्तन के कारण देश में बढ़ेगी गर्मी और बाढ़ का संकट….मानसून की बारिश शुरू होते ही यूपी के तराई इलाके बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और सिद्धार्थनगर सहित पूर्वांचल के कई जिलों पर बाढ़ का संकट हर साल मंडराने लगता है। इतना ही नहीं, जलावायु परिवर्तन के कारण देशभर में बाढ़ की स्थितियां लगातार बढ़ रही हैं, जो आगे और भी बढ़ेंगी।

हाल ही में प्रकाशित पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट ‘भारतीय क्षेत्र पर क्लाइमेट चेंज का असर’ के मुताबिक 21वीं सदी में भारत में गर्मी बढ़ने के साथ ही तेज बारिश के दिन बढ़ेंगे और बाढ़ की घटनाएं ज्यादा सामने आएंगी। भारतीय मौसम विभाग और भारतीय उष्ण कटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) ने 1951-2015 तक के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर भारतीय परिक्षेत्र में जलावायु परिवर्तन के असर से देश में बाढ़ का संकट और गहराने की बात बताई है।

भारत में जलवायु परिवर्तन के असर के बाद वर्ष 1951 से 2015 के बीच वार्षिंक औसत अधिकतम तापमान 0.15 डिग्री बढ़ और गया है, जबकि न्यूनतम तापमान 0.13 डिग्री बढ़ गया है। इसका अर्थ है कि आगे दिन और रात ज्यादा गर्म होंगे। वर्ष 2019 में जुलाई से सितंबर के दौरान कम वक्त में ज्यादा बारिश होने से 14 राज्यों में बाढ़ से लाखों लोगों को नुकसान पहुंचा और अरबों की सम्पत्ति का नुकसान हुआ। इससे जाहिर है कि गर्म वातावरण से बाढ़ का बढ़ता खतरा और बढ़ रहा है।

 

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