कोरोना संकट के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में प्रदेश लौटे हैं। सरकार महिलाओं को उनकी क्षमता और योग्यता के आधार पर रोजगार देगी। जिससे हर एक महिला की प्रति माह 8 हज़ार से 15 हज़ार रुपए तक आय हो सके। कोरोना संकट के दौरान देश के अन्य राज्यों से 30 लाख प्रवासी मजदूर राज्य वापस आए है जिनमे से दस लाख से ज्यादा महिलाएं है।

यूपी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत इस वक़्त 3 लाख 61 हजार 140 महिला एचएचजी हैं और इनसे 38 लाख 37 हज़ार 486 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। 1 लाख 80 हज़ार 773 एचएचजी की 8 लाख 17 हज़ार 769 महिलाएं सैनिटाइजर, जरी जरदोजी, चिकनकारी, दोना-पत्तल, ऑटो, ई-रिक्शा, सोलर लैंप, मास्क और मोमबत्ती बनाने जैसे करीब 68 तरह से अलग-अलग में काम में लगी हुई हैं। राज्य सरकार ने महिलाओं को नए क्षेत्र रोजगार देने के लिए योजना बनाई है। जिसमे 1 लाख से ज्यादा परिषदीय स्कूलों में मिड डे मील बनाने का काम समूहों को दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त महिला स्वयं सहायता समूहों को अब गांवों में राशन की दुकानें दी जाएंगी। मनरेगा के तहत भी 50 मजदूरोंपर एक महिला मेट की नियुक्ति की जाएगी। 58 हजार बैंक कॉरेस्पोंडेंट सखी गांवों में बैंक और जनता के बीच की कड़ी के रूप में की नियुक्ति होंगी। सीएम योगी ने 15 जून से 1 करोड़ मानव दिवस रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा है, एक करोड़ श्रमिक पर 2 लाख मेट नियुक्त किए जाएंगे। इनमें 50 प्रतिशत (यानी एक लाख मेट एचएचजी की महिलाएं ही होंगी।

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