10

लॉकडाउन की वजह सब्जी कारोबारी अपनी फसल नहीं बेच पा रहे जिसकी वजह से लगातार सप्लाई कम होने से दामों में इजाफा होता जा रहा है। कोरोना काल से पहले सितंबर-अक्टूबर के महीने में प्याज की कीमतें आसमान छू ही थी। लेकिन अब आलू और टमाटर की कीमतें छलांग मार रही है। जबकि भारत का खुदरा महंगाई दर या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जून में 6.09 प्रतिशत रहा है।  अगर उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़े पर नजर डाले तों, शुक्रवार को आलू और टमाटर की अखिल भारतीय खुदरा कीमतों में क्रमश: 30 रुपए और 50 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई, जबकि दो से तीन महीने पहले आलू और टमाटर की कीमत बाजार में लगभग 20 रुपए प्रति किलो तक थी।

बीते साल सितंबर-अक्टूबर में प्याज की कीमतों में भारी इजाफा हुआ था लेकिन अब प्याज के दामों में काफी गिरावट आ गई है। पिछले साल प्याज के स्टॉक में कमी, जिसने प्याज की कीमतों को बेकाबू कर दिया था। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्याज का औसत बिक्री मूल्य जनवरी में लगभग 78 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर मार्च में 36 रुपये, मई में 22.5 रुपये और चालू महीने के दौरान 20 रुपये तक गिर गया है। जबकि दूसरी तरफ आलू का औसत बिक्री मूल्य दोगुना से भी ज्यादा हो गया है। जबकि टमाटर की कीमतों में अस्थिरता लगातार बनी हुई है। जनवरी में 30 रुपये किलो से लेकर मार्च में 22 रुपये और मई में 14 रुपये, इस महीने 57 रुपये तक बढ़ोत्तरी देखी गई।

वर्तमान मूल्य वृद्धि जून के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि आम तौर पर ऊपज का समय नहीं होने के कारण सामान्य तौर पर टमाटर की कीमतों में तेजी आती है और पिछले पांच साल के आंकड़ों का यही रुझान है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, पंजाब, तमिलनाडु, केरल, जम्मू और कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश देश के कम टमाटर उत्पादन करने वाले राज्य हैं। वे आपूर्ति के लिए अधिक उत्पादन करने वाले राज्यों पर निर्भर करते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में सालाना लगभग एक करोड़ 97 लाख टन टमाटर का उत्पादन होता है, जबकि खपत लगभग एक करोड़ 15 लाख टन है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here