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संवाददाता सम्मेलन पत्रकारों को संबोधित करते हुए डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडहेनम गेब्रयेसस ने कहा-“निकट भविष्य में पहले की तरह सब कुछ सामान्य होना अभी मुशिकल है। ”उन्होंने बताया कि जहां दुनिया के कई देशों ने इस घातक महामारी पर काबू पा लिया है वहीं कई देश इस  पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप और एशिया में बहुत सारे देश इस महामारी को लेकर गलत दिशा में जा रहे हैं, जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने विश्व के कुछ नेताओं का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग इस महामारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं है कि महामारी कितनी खतरनाक स्थिति में पहुंचती जा रही है। अमेरिका में विशेषकर दक्षिण और पश्चिम में मृतकों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है।  अमेरिका के फ्लोरिडा में एक दिन में संक्रमितों की संख्या में रिकार्ड तोड़ बढ़ोतरी हो रही है। अमेरिका में हालात भयावाह होते जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमें लगता है कि हम इस पर काबू पा सकते हैं लेकिन इसके लिए हमें काफी सतर्कता बरतनी होगी सोशल डिस्टेंशिंग का पालन करना होगा।

बीमारी के स्रोत पता लगाएगा बीजिंग

बता दें कि इस बीच डब्ल्यूएचओ के दो विशेषज्ञ महामारी की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए चीन गए हुए हैं। वे वहां कोरोना वायरस के उन स्रोतों की जांच करेंगे।  जहां से यह वायरस निकला और दुनिया भर को अपनी चपेट में ले लिया। गौरतलब है कि मध्य चीन के वुहान शहर में इस वायरस का पहली बार पता चला था,लेकिन चीन ने शुरूआती दिनों में दुनिया से इस महामारी को छिपा कर रखा। इधर बीजिंग डब्ल्यूएचओ को जांच की अनुमति देने के लिए तैयार नहीं था, लेकिन डब्ल्यूएचओ द्वारा बुलाए गए देशों के विरोध के बाद वह तैयार हो गया। अब जांच के बाद ही सच्चाई पता चल पाएगी कि  कोरोना वायरस चीन की सोची समझी साजिश का हिस्सा है या फिर महज एक वीमारी जो किसी जानवर से फैली है और  पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुकी है।

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