10 भारतीय जवानों को हिरासत में ले लिया था जिन्हें तीन दौर की उच्चस्तरीय वार्ता सहित कुटनीतिक और अन्य सैन्य चैनलों के माध्यम से हुई गहन वार्ता के बाद रिहा आज रिहा कर दिया गया। हालंकि इसके पहले सरकार और सेना ने सुरक्षा की दृष्टि से अभी तक यह जानकारी छिपाकर रखी थी कि गलवान घटी में हिंसक झड़प के बाद कोई सैनिक लापता हुआ है। वह यही कहती रही कि इस झड़प के दौरान कोई सैनिक लापता नहीं हुआ है।

वजह यह थी कि दोनों पक्षों के बीच बढ़े तनाव के बीच सैनिकों की सुरक्षा को देखते हुए इन वार्ताओं की जानकारी को बाहर नहीं आने दिया गया। भारतीय सेना और विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बस इतना कहा था कि गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प में कोई भी भारतीय जवान गायब नहीं हुआ था।

गलवान घाटी में पेट्रोल प्वाइंट 14 पर भारतीय और चीनी उच्चाधिकारियों के बीच चली तीन दौर की वार्ता के बाद चीन ने 10 भारतीय जवानों को छोड़ दिया। मेजर जनरल अभिजीत बापट ने इस प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व किया। लेह स्थित 3 इन्फेंट्री डिविजन के कमांडर मेजर जनरल अभिजीत बापट और उनके चीनी समकक्ष ने गुरुवार को तीसरी बार मुलाकात की। दोनों देशों के बीच इन बैठकों का आयोजन सीमा पर व्याप्त तनाव की स्थिति को कम करने के मकसद से किया गया था।

अब तक सात बार हो चुकी है वार्ता

बता दें कि भारत-चीन सीमा पर बीते मई से तनाव की स्थिति है और तब से लेकर अब तक दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सात बार मिल चुके हैं। इस मामले से जुड़े लोगों ने अधिकारियों ने बताया कि रिहा होने के बाद इन सभी जवानों को चिकित्सा जांच के लिए भेजा गया। इसके बाद अधिकारियों ने इनसे पकड़े जाने के बाद हुई कार्रवाई को लेकर पूछताछ की।

हालंकि 15 जून की झड़प के बाद भारतीय सैनिकों की स्थिति के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि आज दोपहर सेना द्वारा स्पष्ट किया गया है कि गलवान में हुई हिसंक झड़प में कोई भी भारतीय सैनिक गायब हुआ है। गौरतलब है कि आखिरी बार चीनी सेना ने 1962 में उस समय सैनिकों को पकड़ा था जब दोनों देशों के बीच सीमा युद्ध हुआ था।

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