भारत में भी वैश्विक महामारी कोरोनावायरस तेजी के साथ फैल रहा है लेकिन इसके रोकथाम के लिए सरकार उचित कदम उठा रही है और देश के नागरिकों का कोविद-19 जांच किया जा रहा है जिससे कोरोनावायरस से पीड़ित मरीजों का सही इलाज हो और भारत कोरोना मुक्त हो। ऐसे में देवबंद कि दारुल उलूम ने पवित्र रमजान के महीने में एक फतवा जारी किया है जो कोरोनावायरस से संबंधित है और यह सभी रोजा रखने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए है।

आपको बता दें कि दारुल उलूम ने कोरोना वायरस और रमजान के रोजे को लेकर एक बेहद अहम फतवा दिया है। इफ्ता विभाग के पैनल में शामिल मुफ्तियों ने कहा है कि रोजे की हालत में कोरोना टेस्ट कराने के लिए नाक या मुंह से सैंपल देना जायज है। इससे रोजा नहीं टूटेगा। कोरोना टेस्ट कराने को लेकर दारुल उलूम के फतवे पर तंजीम अब्ना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती यादे इलाही कासमी का कहना है कि आज जैसे हालात हैं, उसे देखते हुए यह फतवा बेहद अहम है क्योंकि टेस्ट कराने वाले लोगों को यह बात परेशान कर रही थी कि इस अमल में कहीं उनका रोजा न टूट जाए, लेकिन दारुल उलूम के मुफ्तियों ने रहनुमाई कर उनके इस डर को दूर कर दिया।

आपको बताते चलें कि कोरोना के टेस्ट के लिए हलक (मुंह) या नाक में रुई लगी जो स्टिक डाली जाती है, उस पर कोई केमिकल या दवा लगी नहीं होती। यह एक बार ही मुंह में डाली जाती है। उस पर मुंह से जो गीला अंश लगता है, उसे मशीन के जरिए चेक किया जाता है। इसलिए कोरोना टेस्ट कराने से रोजा नहीं टूटेगा। मुंह आदि में स्टिक देने से रोजे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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