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महिला उपदेशक कलैरसी नटराजन ने एक मंच पर बयान देते हुए कहा हाई की, “दुनिया में हिन्दू नाम का कोई धर्म ही नहीं है, इसका अस्तित्व मात्र एकाध सदी पुराना है.” जब वह यह बयान दे रही थी तो वहाँ पर तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष मुथुवेल करुणानिधि (MK) स्टालिन भी उसी मंच पर मजूद थे.

इन दोनों बड़े नेताओं में से किसी ने भी महिला उपदेशक कलैरसी नटराजन के बयान पर आपत्ति नहीं जताई. इस बयान के बाद उन्होंने यह भी कहा की, “सब शैव हैं और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण तो ये है कि हम सब तमिल हैं.” फिर भी यह दोनों नेता चुपचाप सुनते रहे. अब बताया जा रहा हैं की, वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा यूनिट ने इस बयान की कड़ी निंदा की हैं.

राजनीतिक विश्लेषक शहजाद जयहिंद ने इस बयान पर अपने विचार प्रगट करते हुए कहा हैं की, “जब इस तरह का विवादित और आपत्तिजनक बयान दिया गया, तब MK स्टालिन चुप बैठे हुए थे, ऐसे में उन पर सवाल उठना लाजिमी है.” एक तरफ जहां स्टालिन महिला उपदेशक कलैरसी नटराजन हिन्दू धर्म न होने के दावे के साथ खड़े दिखे वहीं वह यह दावा भी करते नज़र आये की उनकी पार्टी ने हिन्दू धर्म के लिए बहुत कुछ किया हैं.

यानी अगर आप यह मान रहें हैं की हिन्दू नाम का कोई धर्म नहीं हैं तो आप यह कैसे कह सकते हैं की हमने उस धर्म के लिए बहुत कुछ किया. खैर एम के स्टालिन ने बयान देते हुए कहा की, “1967-75 के बीच जब डीएमके की सरकार थी तो 5000 मंदिरों का जीर्णोद्धार किया गया. पहले तो ‘Charitable Endowments department (HR&CE)’ का कोई अलग विभाग ही नहीं था, इसे डीएमके ने बनाया. 1996-2001 में 2459 मंदिरों की मरम्मत हुई, तब भी डीएमके की सरकार थी.”

दरअसल तमिलनाडु में बीजेपी का वर्चस्व बढ़ता देख कर NDA कि सहयोगी सत्ताधारी पार्टी AIADMK और DMK जैसी स्थानीय पार्टियों की बेचैनी बढ़ती जा रही हैं. ऐसे में यह कयास भी लगाए जा रहें हैं की विधानसभा चुनाव आते-आते AIADMK अपना गठबंधन NDA से तोड़ लेगी, जिस प्रकार पंजाब में शिरोमणि अकाली दल ने NDA के साथ तोडा हैं. देखना यह होगा की इसका फायदा BJP को मिलेगा या फिर BJP को इसका नुक्सान उठाना पड़ेगा.

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