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भारत सरकार के सड़क एवं राजमार्ग परिवहन मंत्रालय ने बयान जारी कर रहा कि ऐसा करने के पीछे हादसों में होने वाली मौतों पर रोक लगाने की कोशिश है। सरकार का ये निर्णय घटिया क्वालिटी की हेलमेट के उत्पादन और पूरी तरह से रोक लगाने के लिए है। मामला तो इस आदेश के पहले ही यह तय हो जाना था कि घटिया क्वालिटी के हेलमेट बाजार में ही नहीं आते। घटिया क्वालिटी के हेलमेट बाजार में आये और उपभोक्ताओं के साथ छल किया गया। इस निर्णय के साथ पूर्व में कमजोर क्वालिटी के हेलमेट बनाने वालों पर भी कार्रवाई निश्चित की जानी चाहिए।

नये आदेश को जहां लाया जा रहा है वहीं पुराने हेलमेट को रिप्लेस भी करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उत्पादक कम्पनी पुराने हेलमेट की सामग्री उपयोग कर नया हेलमेट उपभोक्ता को उपलब्ध करा देती। सरकार ने इसके लिए हेलमेट फॉर राइडर्स ऑफ टू व्हीलर्स मोटर व्हीकल क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर पास किया है। इस आदेश के बाद सिर्फ बीआईएस स्टैंडर्ड सर्टिफाइड हेलमेट का ही निर्माण और विक्रय हो सकता है। भारत सरकार के परिवहन मंत्रालय ने ये आदेश सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के निर्देश के बाद दिया है। कमेटी में बीआईएस और एम्स के विशेषज्ञ भी शामिल थे।

इस कमेटी ने मार्च 2018 में इस बाबत निर्देश जारी किए थे जिसमें हल्के और मजबूत हेलमेट के इस्तेमाल के लिए कहा गया था। कमेटी के सुझावों को ध्यान में रखते हुए बीआईएस ने भी नियमों में बदलाव किया है ताकि कम वजनी, लेकिन मजबूत हेलमेट का उत्पादन किया जा सके। भारत में हर साल 1.7 करोड़ हेलमेट का निर्माण होता है। जिनेवा बेस्ड इंटरनेशनल रोड फेडरेशन ने भारत सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। संस्था ने कहा कि सरकार के इस कदम से हादसों में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में कमीं आएगी।

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