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कोरोना की दूसरी लहर उत्तर प्रदेश में कहर बरपा रही है। रोजाना तीस हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है। लोगों की कोरोना जांच नहीं हो रही है, जांच हो रही है तो रिपोर्ट देर से आ रही है। रिपोर्ट अगर पॉजिटिव आ जाए तो इलाज के लिए अस्पताल नहीं मिल रहा है। दवा नहीं मिल रही, ऑक्सीजन नहीं रही है। सूबे के बस्ती जिले में शव उठाने के लिए किसी का सहयोग नहीं मिल रहा है। मामला भानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। जहां एक महिला के पति की मौत हो गई तो शव घर ले जाने के लिए किसी साथ नहीं मिला। संकट की इस घड़ी में अपनों ने ही मुंह मोड़ लिया। महिला पांच घंटे लाचार और बेबस बैठी रही लेकिन उसे मदद नहीं मिली।

कोरोना संक्रमण की डर से लोगों ने महिला की मदद नहीं की। शव को अस्पताल से घर ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। ऐसा नहीं था कि अस्पताल के बाहर वाहन नहीं थे। वाहन तो थे लेकिन संक्रमण के खौफ ने उन्हें महिला की मदद करने से रोक लिया। काफी देर बाद आस पास के लोग महिला की मदद के लिए आये और एक वाहन में शव को बैड़वा समय माता मंदिर के पास घाट पर ले गए। जहां शव को JCB की मदद से गड्डा खोदकर शव को वहीं दफना दिया। गया

मृतक करीब 7 दिन पहले ही गांव आया था। उसकी तबियत तभी से काफी खराब थी। इस बीच उसने कोरोना संक्रमण की जांच नहीं कराई और उसकी शुक्रवार को तबियत खराब ज्यादा हो गई। इस दौरान महिला अपने पति को एंबुलेंस से लेकर सीएचसी पहुंची। डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया लेकिन तब तक मरीज की मौत हो गई। परिवार में महिला के कोई और पुरुष सदस्य नहीं था, जिसकी वजह से महिला को पांच घंटे तक वाहन के लिए इंतजार करना पड़ा।

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