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दक्षिणी पोर्टल मनाली से 25 किलोमीटर की दूरी पर 3060 मीटर की ऊंचाई पर बनी यह सुरंग उत्तरी पोर्टल 3071 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। लाहौल घाटी में तेलिंग, सीसू गांव के नजदीक इस सुरंग का आकार घोड़े की नाल के आकार जैसा है। इस दो लेन वाली सुरंग की चौड़ाई आठ मीटर है जबकि इसकी ऊंचाई 5.525 मीटर है। इस सुरंग की खासियत यह है कि यह दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है। 9.02 किमी लंबी यह टनल मनाली को पूरे लाहौल स्पीति घाटी से जोड़े रखेगी। पहले घाटी छह महीने तक भारी बर्फबारी के कारण शेष हिस्से से कटी रहती थी। इस राजमार्ग पर प्रतिदिन तीन हजार कार और 1500 ट्रकें 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ जा सकेंगे। चूँकि इस टनल को बनाने का निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने लिया था इस लिए मोदी सरकार ने उनके सम्मान में दिसंबर साल 2019 में इस सुरंग का नाम अटल सुरंग (Atal Tunnel) रखने का फैसला किया था। सुरक्षा सुविधाओं से लैस इस सुरंग में अग्नि शमन, रोशनी और निगरानी के व्यापक इंतजाम किये गए हैं।

2002 में रखी गयी थी आधारशिला 

गौरतलब है कि रोहतांग दर्रे के नीचे बनाई गई इस ऐतिहासिक सुरंग को बनाने का निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में तीन जून 2000 को लिया गया था और 26 मई 2002 को इसकी आधारशिला रखी गयी और इसके बाद से सीमा सड़क संगठन सभी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद इसे पूरा करने में जुटा था। साल 2014 में पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने इस निर्माण स्थल का दौरा किया था और कार्य की प्रगति का जायजा लिया था। सुरंग का 40 प्रतिशत कार्य पिछले दो सालों में पूरा किया गया है और इसके निमार्ण पर 3200 करोड़ रूपये की लागत आई है। सुरक्षा कारणों के मददेनजर इस सुरंग के दोनों और बैरियर लगे हुये हैं। आपात स्थिति के लिए हर 150 मीटर पर टेलीफोन और हर 60 मीटर पर अग्निशमन यंत्र स्थापित किये हैं। घटनाओं का स्वत पता लगाने के लिए हर ढाई सौ मीटर पर सीसीटीवी कैमरा और हर एक किलोमीटर पर वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली लगाई गयी है। हर 25 मीटर पर आपात निकास के संकेत है तथा पूरी सुरंग में ब्रोडकास्टिंग सिस्टम लगाया गया है। सुरंग में हर 60 मीटर की दूरी पर कैमरे भी लगाये गये हैं, जिससे सुरंग पर 24 नजर रखी जा सके और आपात स्थिति में जरूरी सुविधाएँ पहुंचाई जा सके।

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