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एक बार यही प्रसन राजीव दीक्षित जी ने अपने ही घर में उठाया, उनके ताऊ जी पुलिस में बड़े अधिकारी थे उनको राजीव भाई ने एक बार पूछा कि आप ये डंडा लेकर क्यों चलते है तो उन्होंने कहा कि मुझे भी नहीं मालूम | तो राजीव भाई ने कहा कि पता लगाओ इसका कुछ तो कारण होगा फिर उन्होंने कुछ अभ्यास किया और बताया कि  ये पुलिस मैन्युअल में लिखा हुआ है कि हर पुलिस ऑफिसर को डंडा लेना ही पड़ेगा तो राजीव भाई ने कहा कि क्यों लिखा हुआ है तो 1860 का ही एक कानून है जिसको कहते है Indian Police Act, उस कानून में ये लिखा हुआ है कि पुलिस जो है वो अंग्रेजो की है और डंडा जिसपर चलेगा वो भारतवासी है तो अंगेजो की पुलिस के हाथ में डंडा होना चाहिए ताकि वो जब चाहे तब भारतवासियों को पिट सके

तो इंडियन पुलिस एक्ट के हिसाब से हर अंग्रेज पुलिस ऑफिसर को एक अधिकार दिया गया है जिसको अंग्रेजी में कहते है Right to affiance और जिसकी पिटाई हो रही है उसको कोई अधिकार नहीं है right to defense. मुझे अपना डिफेन्स करने का अधिकार नहीं है यदि पुलिस ने मुझे डंडा मारा और मैंने उसको रोक दिया तो केस मेरे ऊपर बनेगा ना की उसके ऊपर, और मुकदमा ये होगा कि अपने एक पुलिस ऑफिसर को उसकी ड्यूटी करने से रोका और उसकी ड्यूटी क्या है मेरे ऊपर डंडा चलाना, ये कानून 1860 का बना हुआ है जो आज भी पुरे देश में लागु है उसमे कही पर भी कोई भी बदलाव नहीं है

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