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हिन्दू धर्म में कई शास्त्र, पुराण, ग्रन्थ, काव्य और महाकाव्य है | इन सब मे सबसे लोकप्रिय महाकाव्य रामायण है | रामायण में श्रीहरि विष्णु की कथा कही गयी है | रामायण में बताए गया है कि किस तरह प्रभु श्रीराम ने अधर्म पर धर्म की विजय पायी थी | रामायण में कई ऐसे स्थानों का वर्णन सुनने को मिलता है, जिन्हे सुनकर अक्सर लोगो को संशय होता है कि क्या ये स्थान सच में थे | ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे ही स्थानों के बारे में बताने जा रहे है, जिनका वर्णन रामायण में किया गया है | तो चलिए जानते है, आज आपके लिए क्या ख़ास है |
अयोध्या
 
 
अयोध्या का नाम सुनते ही मन में श्रीराम का नाम अवश्य आता है | रामायण काल में अयोध्या कौशल साम्राज्य की राजधानी थी | राम जी का जन्म रामकोट अयोध्या के दक्षिणी भाग में हुआ था | जहाँ आज भी उनके जन्म के साक्ष्य मौजूद है |
प्रयाग
 
 
प्रयाग वह स्थान है, जहाँ प्रभु श्रीराम ने वनवास के लिए जाते समय पहली बार विश्राम किया था | कुछ समय पहले इस स्थान को इलाहबाद के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब इसे प्रयागराज के नाम से जाना जाता है | बता दे वैदिक काल में प्रयाग को कौशाम्बी भी कहा जाता था |
चित्रकूट
 
 
रामायण के अनुसार चित्रकूट वह स्थान है, जहाँ प्रभु श्रीराम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास के 11 वर्ष बिताये थे | इस स्थान पर ही भरत जी राम जी से मिलने आये थे और दशरथ जी के देहांत की सुचना दी थी | बता दे यहाँ श्रीराम और माता सीता के पदचिन्ह आज भी मौजूद है |
जनकपुर
 
 
माता सीता जनकपुर की राजकुमारी थी, इसलिए उन्हें जानकी भी कहा जाता है | जनकपुर में ही माता सीता और राम जी का विवाह हुआ था | यहाँ आज भी उनके विवाह का मंडप मौजूद है | ये स्थान नेपाल के काठमांडू के दक्षिण पूर्व में मौजूद है |
रामेश्वरम
 
 
रामेश्वरम वह स्थान है, जहाँ वानर सेना ने लंका पर चढ़ाई करने के लिए पुल का निर्माण किया था | इसके अलावा इसी स्थान पर राम जी ने महादेव की आराधना की थी | इस समय ये स्थान तमिलनाडु में स्थित है | राम जी का बनाया वह पुल आज भी यहाँ मौजूद है, जिसे रामसेतु कहा जाता है और दुनियाभर में एडम्स ब्रिज (Adam’s Bridge) कहा जाता है |
किष्किंधा
 
 
रामायण में किष्किंधा नगरी को वानरराज सुग्रीव का राज्य बताया गया है | सुग्रीव से पहले ये बाली का साम्राज्य था, बाद में श्रीराम ने बाली का वध कर सुग्रीव को यहाँ का राजा बनाया था | किष्किंधा से कुछ दूरी पर पम्पासर झील है, जहाँ रामजी और लक्ष्मण जी ने विश्राम किया था | वर्तमान में यह स्थान कर्नाटक के हम्पी में है | बता दे ये स्थान UNESCO की विश्व धरोहर में शामिल है |
दंडकारण्य
 
 
ये वह स्थान है, जहाँ लक्ष्मण जी ने रावण की बहन शूपर्णखा की नाक काटी थी | उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और आँध्रप्रदेश के बीच ये घना जंगल फैला है | यहाँ प्रभु श्रीराम की निशानियां मौजूद है, शायद इसी वजह से ये स्थान असीम शांति का अहसास दिलाता है |

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