बंगलुरू में हार के बाद सबको याद आ रहे हैं चहल और कुलदीप :– कुलचा के नाम से प्रसिद्ध भारत की यह स्पिन जोड़ी बीते करीब दो वर्ष से भारतीय टीम की जीत की प्रमुख खेवनहार रही है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 में प्रतिभावानों को मौका देकर भारत ने मोहाली मैच तो जीता लेकिन जो अपमानजनक पराजय बंगलुरू में नौ विकेट की मिली वो हर किसी को टीस दे रही है।

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कुलदीप यादव और यजुवेन्द्र चहल के स्थान पर टीम में प्रमुख स्पिनर के रूप में वाशिंगटन सुंदर और क्रुनाल पांड्या को शामिल किया गया है जबकि रविन्द्र जडेजा तीसरे स्पिन गेंदबाज हैं पर उनको विशुद्ध हरफनमौला के तौर पर टीम में जगह दी हुई है।

वाशिंगटन सुंदर एक अच्छे गेंदबाज हैं और उनकी लैंग्थ व लाइन भी किफायती रही है लेकिन विकेट लेना अभी उनको सीखना होगा। वहीं क्रुनाल पांड्या बतौर बल्लेबाज एक अच्छे हिटर माने जाते हैं लेकिन उनकी गेंदबाजी में वो धार नजर नहीं आती है जो कि कुलदीप या चहल में थी।

जब टीम द्वारा 135 रनों का लक्ष्य दिया जाए तो उस वक्त टीम को क्या जरूरत होती है, इस बात का अभाव वाशिंगटन और क्रुनाल दोनों की ही गेंदबाजी में साफ देखा जा सकता था।

बंगलुरू में विकेट निकालकर ही भारत मैच में वापसी कर सकता था लेकिन क्रुनाल पांड्या ने सही लैंग्थ को तो पकड़ा ही नहीं बल्कि अपने 3.5 ओवरों में 40 रन लुटाकर टीम को बिना संघर्ष हार की ओर धकेल दिया। वाशिंगटन सुंदर ने अपने चार ओवरों में 27 रन दिए जो कि 6.75 रन प्रति ओवर की दर से थे जो कि कोई विशेष प्रीावशाली गेंदबाजी नहीं मानी जा सकती है जबकि दक्षिण अफ्रीका के स्पिन गेंदबाज तबरेज़ शमसी ने अपने कोटे के चार ओवरों में सिर्फ 23 रन देकर एक विकेट भी निकाला था। दक्षिण अफ्रीका के दूसरे फिरकी गेंदबाज व्योर्न फॉर्च्यून ने अपने फेंके तीन ओवरों में मात्र 19 रन देकर दो महत्वपूर्ण विकेट निकाले जो कि उनकी काबिल गेंदबाजी का उदाहरण थे।

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