वैज्ञानिकों ने इस एंटीबॉडी को 47D11 नाम दिया है। जिसे चूहों में पाए जाने वाली 51 सेल लाइंस कोशिकाओं में खोजा गया है। इस एंटीबॉडी के इंसानों के लायक बनाने के लिए जेनेटिकली इंजीनियर किया गया है। जो कोरोना वायरस को कमजोर करने का काम करेगा। जिस टीम ने एंटीबॉडीज की खोज की है उसे यूट्रेच यूनिवर्सिटी के प्रोफेरस बेरेंड-जोन बॉश लीड कर रहे है।

प्रोफेसर बॉश के मुताबिक, इस एंटीबॉडी में एसी क्षमता है जिसकी मदद से कोविड-19 को खत्म किया जा सकता है। ये एंटीबॉडी वायरस के लेयर पर हमा करती है जिसकी वजह से वह सीधा वायरस की कोशिकाओं पर चिपक जाता है और फिर वायरस इंसानी शरीर में नहीं फैल पाता।

इसके आगे प्रोफेसर बॉश ने कहा कि अगर ये एंटीबॉडी कोरोना वायरस को फैलने से नहीं रोक पाता। तो अच्छी बात ये है कि इसकी मदद से कोरोना वायरस बड़ी धीरे-धीरे फैलेगा।

बता दें कि वैज्ञानिकों ने सबसे पहले चूहे को कोरोना वायरस से संक्रमित किया था। इस दौरान जैसे ही कोरोना वायरस ने चूहे के शरीर में प्रवेश किया। तो चूहे के शरीर में 51 तरह की एंटीबॉडी निकलने लगी। इसी में 47D11 एंटीबॉडी वैज्ञानिकों को मिली। जो कोरोना वायरस की बाहरी परत को नष्ट कर रही थी। जिसके बाद वैज्ञानिकों ने तुरंत इसे इंसानों को लिए बनाने शुरू कर दिया।

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