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बता दें कि जबलपुर के एलपीआर रेंज में लंबे समय से इन उन्नत तोपों का परीक्षण किया जा रहा था। जबलपुर के एलपीआर रेंज आगमी तीन वर्षों में तीन सौ सारंग तोपें भारतीय सेना को मुहैया करानी है। इसी कड़ी में यह परीक्षण किया जा रहा है। यहां यह परीक्षण पहली खेप में सात सारंग पर किया गया जो सफल रहा। परीक्षण के दौरान सेना के अफसरों ने सारंग तोप की बेजोड़ ताकत को भी देखा। एलपीआर रेंज में जब इसका परीक्षण किया गया तो यह हर मानक में सफल हुई है।

आपको बता दें कि जबलपुर के जीसीएफ याने गन कैरिज फैक्ट्री और वीएफजे यानी व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में काफी समय से इन तोपों के अपग्रेडेशन का काम चल रहा है। गौरतलब है कि भारतीय सेना बेजोड़ ताकत से भरपूरसारंग को अपने बेड़े में शामिल करने का बेसब्री से इंतजार कर रही है। सेना के बेड़े में इन तोपों को शामिल करने से सेना की ताकत और भी बढ़ जाएगी,लेकिन इन तोपों को बेड़े में शामिल करने से पहले इनका डीजीक्यूए ने गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण और फायरिंग परीक्षण किया गया। सारंग गन ने परीक्षण के दौरान निर्धारित लक्ष्य भी हासिल किए हैं।

सेना की हरी झंडी मिलने क इंतजार 

फैक्ट्री के एक अधिकारी के मुताबिक एक सादे समारोह में कर्नल एके गुप्ता एसक्यूएल जबलपुर और राजेश चैधरी महाप्रबंधक जीसीएफ ने ब्रिगेडियर आई एम सिंह एवं ब्रिगेडियर जे कार की उपस्थिति में सारंग तोप का निरीक्षण नोट सौंपा। उन्होंने बताया कि इंस्पेक्शन नोट सौपे जाने के बाद अब इन तोपों को सिर्फ सेना की हरी झंडी मिलने का इंतजार है, जिसके बाद इन्हें सीधे देश की सरहदों पर तैनात कर दिया जाएगा। सारंग तोपों की खूबी यह है कि इसकी मारक क्षमता 155 एमएम 45 कैलिबर40 किलोमीटर है।यह अंधेरे में भी वॉर कर सकती है। इसके साथ ही यह ऊंचे पहाड़ों पर भी सटीक निशाना लगाने में ये सक्षम है।

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