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सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य प्रणाली, जिसने 10 जुलाई को अपनी अंतिम वर्चुअल मीटिंग आयोजित की थी, के शुक्रवार को विस्थापन प्रक्रिया की समीक्षा करने की उम्मीद की जा रही है। चीन के सीमा पर गतिरोध के बाद से यह चौथी बैठक होगी। मामले से जुड़े लोगों ने कहा कि “दोनों पक्ष दोनों देशों के नेतृत्व द्वारा सहमति के मुताबिक विघटन और डी-एस्केलेशन प्रक्रिया में हुई प्रोग्रेस को देखेंगे, ‘किसी ने नहीं बताया कि यह प्रक्रिया सरल होगी। यह जटिल और लंबा-खींच सकता है।’

भारत-चीन सैन्य और कूटनीतिक स्तरों पर गहन वार्ता के बावजूद संवेदनशील लद्दाख क्षेत्र में तनाव को कम करने में सफल नहीं हो पाए हैं और एलएसी के कुछ बिंदुओं पर विस्थापन प्रक्रिया तकरीबन रुकी हुई है। भारत ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि चीनी पक्ष पूर्वी लद्दाख से अपने सैनिकों को पूरी तरिके से हटाने, तनाव कम करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता की पूर्ण बहाली के लिए नई दिल्ली के साथ ”ईमानदरी” से काम करेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने एक ऑनलाइन मीडिया वार्ता में बताया कि विमर्श एवं समन्वय कार्य तंत्र के ढांचे के तहत भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर की एक और दौर की बातचीत जल्द होने की उम्मीद है। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने बताया कि इस कूटनीतिक बातचीत के शुक्रवार को होने की संभावना है और इसमें मुख्य ध्यान पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग सो और विवाद के कुछ अन्य बिन्दुओं से सैनिकों को तेजी से पीछे हटाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई को करीब 15 घंटे तक चली कोर कमांडर स्तर की मीटिंग के बाद सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया उम्मीद के अनुरूप आगे नहीं बढ़ी है।

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