भारत बायोटेक ने बनाया है। इस वैक्सीन का जल्द ही ह्यूमन ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा। अब लोगों के दिल में सवाल उठने लगा है कि यह उन तक कितने दिन में पहुंचेंगी यानी वैक्सीन बाजार में कब तक आ जाएगी। तो आइये आज हम आपको बताते है उस प्रक्रिया के बारे में जिससे गुजर कर कोई भी वैक्सीन लैब से मार्केट तक आती है।

लैब से बाजार तक एक दवा पहुंचने में लगभग 12 साल और वैक्सीन को 8-10 साल का समय लगता है, इसमें पहले चरण का ट्रायल दो साल का होता है और यह 1000 से 3000 मरीजों पर किया जाता है। दूसरे चरण का ट्रायल भी 1000 से 3000 लोगों पर किया जाता है और इसमें भी कम से कम दो साल लग जाता है, जबकि तीसरे चरण के ट्रायल में तीन से पांच साल का समय लगता है। यह ट्रायल 15,000 से 30,000 लोगों पर किया जाता है। इसके बाद इस वैक्सीन या दवा की जांच नियामक संस्था द्वारा की जाती है जिसमें कभी-कभी वैक्सीन या दवा का सर्वेक्षण और अधिक लोगों पर करने के लिए कहा जाता है, लेकिन अगर किसी वैक्सीन का ट्रायल जल्दी करना है तो इसमें पहले चरण का परीक्षण सुरक्षा अध्ययनों पर किया जाता है और इसे 50 से 500 लोगों पर किया जा सकता है। ऐसे में इसमें कम से कम चार महीने का समय लग सकता है।

जल्द पूरा होगा ट्रायल

दूसरे चरण का ट्रायल वैक्सीन की डोज के लिए किया जाता है। ये ट्रायल 500 से 1000 लोगों पर किया जाता है और इसमें भी लगभग 4 महीने का समय लगता है। कोरोना की इस वैक्सीन का ट्रायल भी इसी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा यानी इस वैक्सीन का ट्रायल जल्दी पूरा कारने के लिए पहले और दूसरे चरण का ट्रायल एक साथ किया जाएगा। कोरोना वायरस वैक्सीन के मामले में नियामक संस्थाएं पहले और दूसरे ट्रायल को जोड़कर त्वरित परीक्षण की अनुमति दे रही हैं। भारत बायोटेक ने अपनी वैक्सीन की कोई समय सीमा तय नहीं की है। अगर सब ठीक जाता है और ये वैक्सीन ट्रायल के चरण में कारगर सिद्ध हो जाती है तो COVAXIN नाम की यह वैक्सीन 2021 में बाजार में आ सकती है।

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