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इस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एक शोध के मुताबिक Covid-19 से रिकवर हो चुके मरीज़ भविष्य में इन्फेक्शन होने से लंबे समय तक बचे रहें, ऐसा मुश्किल है। भारत में साढ़े सात लाख से अधिक लोग मरीज़ रिकवर हुए हैं और एक्टिव केस चार लाख से कुछ ज़्यादा हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार जिन मरीज़ों में कोरोना के सिर्फ हल्के लक्षण थे। रिकवर हुए ऐसे मरीज़ों के भविष्य में दोबारा इन्फेक्शन से बचे रहने की संभावनाएं कम दिख रही हैं। इससे मजबूत इम्युनिटी और वैक्सीन के लंबे समय तक कारगर साबित होने पर भी संशय खड़े हो रहे।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में एक रिसर्च के हवाले से बताया गया कि कोरोना वायरस के उन 34 मरीज़ों पर परीक्षण किया गया, जिनमें वायरस के हल्के लक्षण दिखे थे। इन 34 मरीजों में से किसी को भी आईसीयू की आवश्यकता नहीं थी। सिर्फ दो को ऑक्सीजन और एचआईवी के इलाज की सुविधा दी गयी थी। साथ ही इन मरीजों को वेंटीलेटर और रेमडेसिविर की ज़रूरत भी नहीं पड़ी थी। शोध के लिए इन मरीज़ों के खून के नमूनों की जांच की गई।

37 दिन बाद लिया गया सेंपल

नमूनों में एंटीबॉडीज़ पर अध्ययन किया गया। इन मरीजों में कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के करीब 37 दिन बाद पहला सेंपल लिया गया और दूसरा नमूना तीन महीने पूरे होने से पहले यानी 86 दिनों के अंदर लिया गया। वैज्ञानिकों ने इन नमूनों का परीक्षण किया इसके बाद जो नतीजे निकले उसके मुताबिक एंटीबॉडी स्तर तेज़ी से कमी आई। एंटीबॉडीज़ का यह नुकसान कोरोना वायरस के पिछले वर्जन SARS की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से हुआ।

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