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यह फैसला मोदी सरकार के उस निर्देश पर किया गया हैं। जिसके अंतर्गत भारत के बॉर्डर से लगने वाले देशों से आयात (Import) को वर्जित करने का लक्ष्य रखा गया है। चीन से चल रहे सीमा पर तनाव के बीच 23 जुलाई को मोदी सरकार के द्वारा नए नियमों का एलान किया गया था।

इस नए आदेश के तहत अब सरकारी रिफाइनरियां अपने इम्पोर्ट टेंडर में इससे जुड़ा एक क्लॉज जोड़ रही हैं। जिसमे अब सरकारी कंपनियां भारत की सीमा से जुड़े देशों की कंपनियों के साथ लेनदेन को प्रतिबंधित (Restricted) करने के लिए टेंडरों में नई शर्त लगा रही हैं।

चीन के राष्ट्रीय अपतटीय तेल निगम (CNOOC), यूनिपेक और पेट्रोचाइना कोकच्चे तेल के आयात वाले टेंडर देने से रोकने के लिए भारतीय कंपनियों ने फैसला किया। इन नए नियमों के मुताबिक, भारतीय टेंडर में भाग लेने के लिए पड़ोसी देशों की कंपनियों को वाणिज्य विभाग के साथ पंजीकरण कराना आवश्यक कर दिया गया था। सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए चीनी कंपनियों द्वारा संचालित या फिर उनके मालिकाना हक वाले तेल टैंकरों की बुकिंग को बंद करने का निर्णय लिया गया है। जहाज भले ही किसी भी तीसरे देश से रजिस्टर्ड क्यों न हो।

चीन के साथ बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए उसके साथ व्यापारिक गतिविधियों को रोकने का सख्त फैसला पिछले माह किया गया है। इस फैसले के बाद व्यापार पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि चीनी चीनी जहाजों की संख्या बेहद कम ही है। मोदी सरकार के इस नए निर्णय के बाद इस कारोबार से जुड़ा हर वो जहाज बाहर रखेगा जिसका संबंध चीन है।

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