सप्ताह या महीने में एक दिन पूरी तरह से मौन का पालन कीजिए।

  • परिंदों के लिए किसी सुरक्षित स्थान पर दाना डालिए। उनके लिए मिट्टी का बर्तन पानी भरकर रखिए।
  • घर-परिवार के सदस्यों के लिए समय निकालिए व उनके साथ बाहर घूमने या पिकनिक मनाने जाइए।
  • बच्चों के साथ खेलिए। माता-पिता या दादा-दादी के साथ बैठकर गप्पें मारिए। वो जो कहना चाहें उसे सुनिए। मन को संतुष्टि मिलेगी।
  • परिवार के सदस्यों के लिए जो उपयोगी चीज़ें हैं, उन्हें उनके मांगने से पहले उपहार के रूप में लाकर दीजिए।
  • व्यायाम के साथ-साथ ध्यान कीजिए। इससे तन के साथ-साथ मन की भी सेहत सुधरेगी। तन-मन की ताजगी कई नये कार्य करने का उत्साह जगाती है।

    किसी गरीब विद्यार्थी को पढ़ाई जारी रखने में उसकी मदद कीजिए। विद्यादान सबसे बड़ा है।

  • अपनी किसी भी गलती को न दोहराने का प्रयास करें। किसी अच्छी बात को अवश्य दोहराने का संकल्प लें।
  • किसी मित्र या परिचित से उपेक्षा के कारण संबंधों काे निभाना कठिन हो रहा हो उसे समय दीजिए, समझने का प्रयास कीजिए। इससे खुशी मिलेगी।
  • अपने व्यवसाय या सेवा में सुधार के लिए कोई प्रशिक्षण लीजिए। कोई सेमिनार या वर्कशाॅप कीजिए। नया सीखते रहने से न केवल कार्य में उत्कृष्टता आती है, बल्कि संतुष्टि भी मिलती है।
  • किसी निर्बल, अशक्त या साधनहीन की मदद कीजिए, उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव लाने का प्रयास कीजिए। खुद को भी संतुष्टि मिलेगी।

    प्रेरणादायक पुस्तक पढ़कर उसे अमल में लाने का प्रयास कीजिए। पुस्तकों ने समाज को बदलने में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • एकरसता व नीरसता से बचिए। अपनी हाॅबी को समय दीजिए। नयी हाॅबी खोजिए। अपनी सृजनात्मकता के विकास के लिए कुछ नया कीजिए।
  • दुश्मन या विरोधी को उसकी गलती के लिए क्षमा कीजिए और खुद की गलतियों के लिए क्षमा मांगिए। मन को शांति िमलेगी। क्षमा हमें हर प्रकार से मुक्त करने का उत्तम साधन है।
  • किसी गलत आदत- धूम्रपान, शराब या अन्य बुरी लत को छोड़ने का संकल्प लीजिए।

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