रहता है कि उसका काम कभी पूरा नहीं होगा। लेकिन ऐसा नहीं होता है अगर व्यक्ति सच्चे मन से अपना काम करे तो उसमें उसे सफलता ज़रूर मिलती है। हालाँकि किसी भी काम को करने में कठिनाई का सामना ज़रूर करना पड़ सकता है, लेकिन अगर लगान सच्ची हो और मेहनत से काम किया जाए तो असफलता का सवाल ही नहीं उठता है। अगर आप भी उन्ही लोगों में से हैं जो असफलता से डरते हैं तो आज हम आपको एक असै उपाय बताने जा रहे हैं, जिससे आपके मन का यह डर हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।

आपको बता दें रमचरित मानस में सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। पूरे रमचरित मानस में हर जगह केवल श्रीराम का गुणगान किया गया है, लेकिन सुंदरकांड ही एक ऐसा अध्याय है, जिसमें सिर्फ़ बजरंगबली का गुणगान किया गया है।

*- मनोवैज्ञानिक नज़रिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला अध्याय है। इसमें ऐसी-ऐसी बातें लिखीं हैं, जिनको पढ़ने के बाद व्यक्ति को मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है। इससे किसी भी काम में सफलता पानें के लिए आत्मविश्वास मिलता है।

*- सुंदरकांड को बजरंगबली की सफलता के लिए याद किया जाता है। अक्सर लोग यह कहते हैं कि आख़िर श्रीरामचरित मानस के पाँचवे अध्याय का नाम सुंदरकांड ही क्यों रखा गया है।

*- जब बजरंगबली माता सीता की खोज में लंका गए थे। उन्होंने देखा कि लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर स्थित

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