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हमारे पुराणों और शास्त्रों में बताया गया है कि श्री कृष्ण जी का जन्म धरती पर अधर्म का नाश करने के लिए हुआ था | कृष्ण जी को जन्म माता देवकी ने दिया था, लेकिन उनका पालन पोषण माता यशोदा ने किया था | इस प्रकार उनकी दो माताएं थे | लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि श्री कृष्ण की 3 अन्य माताए और थी | इस प्रकार श्री कृष्ण के 5 माताए थी | आज हम आपको उन्ही माताओ के बारे में बताने जा रहे है |
देवकी और यशोदा
 
 
सभी जानते है कि माता देवकी ने कृष्ण जी को जन्म दिया था | माता देवकी ने भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जी को जन्म दिया था | इसके बाद वासुदेव जी कृष्ण जी को कंस से बचाने के लिए उन्हें नंदलाल के घर छोड़ आये | यहाँ पर उनका पालन पोषण माता यशोदा ने किया | एक लम्बे समय तक माता यशोदा को इस बात से अज्ञात थी कि कृष्ण उनकी संतान नहीं है | हालाँकि आज भी जब कृष्ण जी की माता का जिक्र होता है, तो सबसे पहले माता यशोदा का ही नाम लिया जाता है |
रोहिणी
 
 
कम लोग ही इस बात को जानते है कि वासुदेव जी की देवकी से पहले एक और पत्नी थी, रोहिणी | इस प्रकार माता रोहिणी कृष्ण जी की सौतेली माँ है | जब वासुदेव और देवकी कंस की कैद में थे | तब रोहिणी नन्द बाबा के घर रह रही थी | देवकी की सातवीं संतान का जन्म माता रोहिणी की कोख से ही हुआ था | वे सातवीं संतान बलराम जी थे |
गुरुमाता
 
 
पुराणों में गुरु की पत्नी को गुरु माता का दर्जा दिया गया है | जब श्री कृष्ण बलराम जी के साथ गुरु संदीपनी के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने गए थे | तब उनकी गुरुमाता ने दीक्षा में उनके खोये पुत्र को माँगा था | तब श्री कृष्ण उनके पुत्र को यमराज से लेकर आये थे | उस समय गुरुमाता ने कृष्ण जी को पुत्र कहा था | साथ ही आशीर्वाद दिया था कि उनकी माता कभी उनसे दूर नहीं जाएगी |
पूतना
 
 
राक्षसी पूतना श्रीकृष्ण जी का वध करने आयी थी | वह अपना दूध पिलाकर कृष्ण जी की जान लेना चाहती थी, लेकिन कृष्ण जी ने दूध पीते हुए उसके ही प्राण हर लिए | पूतना का वध होने पर विष्णु जी ने उन्हें अपनी माता कहा था | उन्होंने कहा था कि उन्होंने पूतना का दूध पिया है, भले ही पूतना की भावना गलत हो, लेकिन इस कर्म से वो उनकी माता ही कहलाएगी |

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