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होम आइसोलेशन के लिए घर में कम से कम दो टॉयलेट होना चाहिए। एचआईवी, अंग प्रत्योरोपित, कैंसर का उपचार प्राप्त करने वाले कमजोर मरीज होम आईसोलेट नहीं किया जाएगा। कोरोना पीड़ित के साथ 24 घंटे एक व्यक्ति देखभाल के लिए होना चाहिए। आईसोलेट होने तक देखभाल करने वाले व्यक्ति और सम्बंधित अस्पताल के बीच सम्पर्क बनाए रखना होना होगा। देखभाल करने वाले व्यक्ति और रोगी के नजदीकी  सम्पर्क में रहने वाले को प्रोटोकाल और उपचार देने वाले डाक्टर की सलाह के अनुसार हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन प्रोफाइलेक्सिस लेनी होगी।

साथ ही आरोग्य सेतु ऐप को भी डाउनलोड करना होगा। स्मार्ट फोन न होने की सूरत में रोगी की ओर से कंट्रोल रूम के टेलीफोन नम्बर पर अपने स्वास्थ्य की जानकारी देनी होगी। अस्पताल में इलाज की जरूरत कब महसूस होगी। ऐसे गम्भीर लक्षण विकसित होने लगे तो अस्पताल भी जाना पड़ेगा। सांस लेने में दिक्कत हो, शरीर में ऑक्सीजन की कमी, सीने में लगातार दर्द या भारीपन हो तो तुरंत अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।

होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमित को पॉजिटिव होने के 10 दिन तक होम आइसोलेट रहना पड़ेगा। इसके बाद अगले सात दिनों तक घर पर ही रह कर अपने स्वास्थ्य की मानीटरिंग करनी होगी। साथ ही होम आइसोलेशन का समय खत्म होने के बाद टेस्ट करना जरूरी नहीं है। होम आइसोलेशन में रखे गए कोविड संक्रमित रोगियों के स्वास्थ्य की स्थिति की मानीटरिंग फील्ड स्टाफ/सर्विलांस टीम के साथ-साथ एकीकृत कोविड कमाण्ड एण्ड कण्ट्रोल सेण्टर के द्वारा किया जाएगा। शरीर का तापमान, पल्स रेट और आक्सीजन संतृप्तता को रिकार्ड किया जाएगा।

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