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भारतीय वायु सेना में राफेल विमानों के शामिल होने से सेना और भी ताकतवर हो जाएगी। भारत के लिए राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के तौर पर पांच विमान फ्रांस से रवाना हो चुके हैं और वह संयुक्त अरब अमीरात के अल दफ्रा एयरबेस पर पहुंच गए हैं।

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बता दें कि इस राफेल को लेटेस्ट फीचर्स के साथ खरीदा गया है. यह वजन से डेढ़ गुना ज्यादा बोझ ले जाने में सक्षम दुनिया का इकलौता जेट है, और तो और इसकी रफ्तार 2130 किमी प्रति घंटा है, यानी ध्वनि की गति से दोगुना, यह

परमाणु हमले में भी सक्षम है। राफेल की नोज पर लगी मल्टी डायरेक्शनल रडार 100 किमी की रेंज में 40 से अधिक टारगेट निशाने पर ले सकता है, इसमें लगा एक टन का कैमरा इतना ताकतवर है कि जमीन पर पड़ी क्रिकेट बॉल तक की फोटो आसानी से ले सकता है।

यह राफेल फाइटर जेट अत्याधुनिक फाइटर प्लेन यूरोफाइटर टायफून, चीन का जे-20, पाकिस्तान का एफ-16, सुपर हॉर्नेट, ब्लॉक-60, मिग-35, साब ग्रिपिन जैसे फाइटर जेट को टक्कर देने में सक्षम। इसमें 3 करोड़ रुपये तक का लेजर बम भी लगा हुआ है. जो दुश्मन को पलक झपकते ही बर्बाद कर सकता है. इसके एक बम की कीमत 44 लाख से 3 करोड़ रुपये तक हो सकती है. आईएस पर हमले में इसी का इस्तेमाल हुआ. राफेल में इस तरह के 6 बम लग सकते हैं।

इसकी खासियतों में से एक खासियत ये भी है कि यह लगातार 10 घंटे से भी अधिक आसमानी उड़ान भर सकता है. इस दौरान इसमें 6 बार ईंधन भरने की जरूरत पड़ती है, लेकिन इसे हवा में ही भरा जा सकता है. इसके अंदर बना टैंक करीब साढ़े 5 टन तक ईंधन स्टोर हो सकता है. बाहरी टैंक में 2,000 लीटर तक ईंधन भरा जा सकता है।

वहीं युद्ध के दौरान राफेल शत्रु की मिसाइल को भटका सकता है, दरअसल इसमें लगा स्पेक्ट्रा इंटीग्रेटेड डिफेंस सिस्टम शत्रु के रडार को जाम करता है और उसकी ओर आती मिसाइल से सचेत करता है. यह छद्म सिग्नल भेज सकता है और

शत्रु मिसाइल का रूट खराब कर देता है, जिससे वह भटक जाती है।

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