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इस बीच ठंड ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है, जिसका असर चीनी सेनाओं पर दिखने लगा है। ठण्ड से उनकी हालत अभी ही खराब होने लगी है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जबकि भारतीय सेना ने सर्दियों की दस्तक देने के मद्देनजर अपनी तैयारियां तेज कर दी है। माना जा रहा है कि सीमा पर अभी टकराव जल्द खत्म होने वाला नहीं है। इधर भारतीय सेना ने सीमा के ऊँचाई वाले स्थानों पर कब्जा जमा लिया है जिससे वह काफी मजबूत स्थिति में है।

दोनों देशों के बीच के हालात देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीमा पर बना गतिरोध अभी लंबा चलने वाला है। हालांकि बीते 10 सितंबर को मास्को में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक हुई थी और पांच बिन्दुओं पर सहमति बनी थी। इन्हीं बिन्दुओं को लेकर लेफ्टिनेंट जनरल स्तर तक की बैठक होनी थी लेकिन पिछले नौ दिनों में अभी यह तय नहीं हो पाया की बैठक कब होनी है। वजह यह है कि चीन ने अभी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और सीमा पर भारत की स्थति मजबूत है इसलिए वह भी किसी जल्दबाजी में नहीं है।

आमने-सामने हैं सेनाएं 

दरअसल, लेफ्टिनेट जनरल स्तर की बातचीत को लेकर चीनी सेना यह महसूस कर रही है कि अब भारतीय सेना ने पैंगोंग की चोटियों पर रणनीतिक पोजीशन हासिल कर ली है। ऐसे में बातचीत के दौरान वह चीनी सेना पर हावी होने की कोशिश कर सकती है। जबकि चीनी पक्ष अभी भी अपने इस रुख पर कायम है कि भारतीय सेना पूरे फिंगर इलाके को खाली करे,जबकि इस क्षेत्र पर हमेशा से भारत का कब्जा रहा है। एक्सपर्ट बताते हैं कि उत्तरी पैंगोंग, रेजांग ला और फिंगर-5 क्षेत्र में तीन स्थानों पर दोनों देशों की सेनाएं एकदम आमने-सामने हैं। उनके बीच मात्र 200-300 मीटर की दूरी है, सीमा पर हालात तनावपूर्ण हैं।

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