वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए पूरी दुनिया ने अपने अपने देशों में लॉकडाउन किया है और इस लॉकडाउन में भारत भी शामिल है जहां 24 मार्च से पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन लगाया गया है। इस लॉकडाउन के दौरान सरकार की तरफ से गरीबों के लिए मुफ्त अनाज का वितरण भी किया जा रहा है ताकि गरीबों को कोई असुविधा नहीं हो लेकिन जब लोग लॉकडाउन के दौरान घरों में है तो इसके लिए मुफ्त मनोरंजन की भी व्यवस्था की जा रही थी लेकिन इस मांग को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें देश में लॉकडाउन के दौरान मुफ्त में कॉलिंग, इंटरनेट और डीटीएच सेवा देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि लॉकडाउन के दौरान सूचना और मनोरंजन मिलना जरूरी है, नहीं तो लोगों की मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ेगा। इस याचिका में कहा गया था कि याचिका में कहा गया था कि फोन, वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग से लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग में अपनों की कमी महसूस नहीं होती है। इसके अलावा फोन, वीडियो कॉलिंग और स्ट्रीमिंग में व्यस्त रहने के कारण लोगों में कम तनाव होगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

आपको बताते चलें कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस एन वी रमना, एस के कौल और बी आर गवई की पीठ ने फटकार लगाते हुए कहा कि किस तरह की याचिकाएं दायर की जा रही हैं? बता दें कि लॉकडाउन के दौरान फ्री में इंटरनेट, कॉलिंग और डीटीएच देने की याचिका अधिवक्ता मनोहर प्रताप ने दायर की थी।

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