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देश में बोलती फिल्मो के जमाने को शुरू हुए 9 दशक बीत चुके है | इस इतनी बड़ी समय अवधि में सिनेमा की दुनिया में कई अनगिनत परिवर्तन आये | ऐसे ही परिवर्तनों में सिनेमा में महिला की मौजूदगी को लेकर भी बड़ा परिवर्तन आया है | बता दे शुरुआत में महिलाओ का सिनेमा में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था |
लेकिन समय के साथ स्थितियां बदली और महिलाओ ने भी सिनेमा में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू की | भारतीय सिनेमा में महिलाओ को लाने का श्रेय केवल एक महिला को जाता है, और वह है, देविका रानी | अपनी बेबाकी और पहली बार स्क्रीन पर किस के लिए मशहूर देविका रानी को ‘फर्स्ट लेडी ऑफ़ इंडियन सिनेमा’ भी कहा जाता है |
देविका रानी का जन्म 30 मार्च 1908 को मद्रास में हुआ था | 1930 के दशक में उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा | बता दे ये वो जमाना था, जब फिल्मों में महिलाओ का आना असहज होता था, लेकिन देविका रानी ने इसकी परवाह किये बिना अपनी राह चुनी |
उस जमाने में पर्दे पर रोमांस सीन दिखने के बारे में सोचा भी नहीं जाता था | बता दे 90 के दशक की फिल्मों में भी रोमांस को पेड़ के पीछे या फूलो को मिलते हुए दिखाया जाता था | तो आप इससे अंदाजा लगा सकते है कि 30 और 40 के दशक में कैसी स्थितियां होगी |
हालाँकि अब किसी को तो ऐसी स्थिति को बदलना था | ऐसे में सिनेमा में ट्रेंड सेट करने आयी देविका रानी ने इसकी शुरुआत की | उन्होंने 1933 में आयी फिल्म ‘कर्मा’ में हिमांशु राय के साथ किसिंग सीन दिया था | बता दे ये किसिंग सीन पुरे 4 मिनट लम्बा था, ऐसे में जाहिर में लोगो ने इसका खूब विरोध किया था |
देविका रानी का करियर 10 साल तक रहा | अपने इस करियर में उन्होंने कई बड़े सितारों संग काम किया | उन्होंने सुपरस्टार अशोक कुमार के साथ जीवन नैया, अछूत कन्या और जन्मभूमि जैसी फिल्मों में काम किया | बता दे वे पहली महिला अभिनेत्री थी, जिन्हे दादा साहब फाल्के अवार्ड मिला था | उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा गया था | साल 1994 के 9 मार्च को 85 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम साँस ली थी |

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