11

शास्त्रों और पुराणों में शनिदेव को एक क्रूर ग्रह या देवता की उपाधि दी गयी है | शनिदेव सूर्यदेव और देवी छाया के पुत्र है | शास्त्रों में बताया गया है कि शनिदेव गुस्सैल प्रवृत्ति के देवता है | यदि किसी ये एक बार गुस्सा हो जाए तो उसके जीवन में विपदा, परेशानियों का आना निश्चित है | ऐसे व्यक्ति को मानसिक से लेकर आर्थिक तक हर तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है | यही वजह से है कि लोग शनिदेव के नाम से भी भय खाते है |

परन्तु ऐसा मानना सही नहीं है | शनिदेव किसी भी व्यक्ति को दुःख उसके कर्मो के अनुसार ही देते है | इसीलिए शनिदेव को न्यायाधीश और कर्मफलदाता भी कहा जाता है | जिन शास्त्रों में शनिदेव के क्रूर और गुस्सैल स्वभाव के बारे में बताया गया है | उन्ही शास्त्रों में शनिदेव के प्रेमपूर्ण और दयालु स्वभाव के बारे में भी बताया गया है | शनिदेव यदि किसी व्यक्ति से प्रसन्न हो जाये तो उसके जीवन में सुखो की बरसात कर देते है | इसके लिए केवल जरूरत होती है, सच्ची श्रध्दा और पुरे विधि विधान से शनि देव की पूजा अर्चना करने की | आज हम आपको शनिदेव की पूजा विधि बताने जा रहे है | जिससे आपकी कुंडली में शनि देव की स्थिति सही होगी, साथ ही शनिदेव की कृपा प्राप्त होगी |
इस तरह करे पूजा
 
 
शनिवार के दिन आप सुबह जल्दी उठे और स्नान आदि से निवृत हो जाए | इसके बाद आप एक लकड़ी के पाटे पर काले रंग का कपडा बिछाए | अब इस पर आप शनिदेव की प्रतिमा स्थापित करे, इसके पश्चात पाते के दोनों ओर घी के दीपक प्रज्वल्लित करे | अब शनिदेव को सुपारी अर्पित करे और पंचगव्य पंचामृत से शनिदेव का अभिषेक करे | अब उन्हें फूल अर्पित करे और गुलाल, सिन्दूर, कुमकुम और काजल लगाए | साथ ही उन्हें तेल में तली चीजे अर्पित करे | पूजा के दौरान आप शनिदेव के मंत्रो का जाप अवश्य करे |
करे ये भी उपाय
शनिवार के दिन आप शरीर पर तेल से मालिश करे, फिर इसके पश्चात् आप स्नान करे |
शनिवार के दिन ब्रह्मचर्य का पालन शुभ फल देता है |
इस दिन लम्बी यात्रा करने से बचे |
कुत्ते को रोटी अवश्य खिलाये |
शनिवार को शनिदेव के साथ साथ हनुमान जी के दर्शन भी अवश्य करे |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here