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कोरोना महामारी ने जहां कई घरों के जलते चिरागों को बुझा दिया है। कई परिवारों को खुशियों को निगल गया है। वहीं कानपुर के हैलेट अस्पताल के कर्मचारियों की कमाई के लिए यह एक बेहतरीन मौका बन कर आया है। यहां के कर्मचारी अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों की मजबूरी का जमकर फायदा उठा रहे हैं। हैलेट अस्पताल में कोविड से मरने के बाद शव को कंधा देने या फिर परिजनों को आखिरी बार मृतक का मुंह दिखाने के लिए बाकायदा रेट फिक्स है। हालांकि यह रेट लोगों का रहन सहन देखकर और उनकी आर्थिक स्थित का अंदाजा लगाकर घटाया-बढ़ाया भी जाता है।
जानकारी के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित नामी गिरामी अस्पताल हैलेट में हर चीज का रेट फिक्स है।

यहां किसी कोरोना संक्रमित के शव को मोर्चरी से एंबुलेंस तक पहुंचाने के नाम पर 500 रुपये प्रति कर्मचारी की दर से वसूली की जा रही है। वहीं एक एंबुलेंस में कई शव जाने की दशा में शव के ऊपर शव रखने का अलग रेट फिक्स है। इस दौरान अगर कोई नियम कानून की बात करता है या रुपये देने में आनाकानी करता है तो उसे कोविड प्रोटोकॉल का हवाला देकर दूर कर दिया जाता। वहीं जो इन कर्मचारियों को उनकी बताई हुई कीमत अदा कर देता है उसे शव पर फूल माला चढ़ाने तक की इजाजत दे दी जाती है। वह लोग बाकायदा शव को छू सकते हैं। फोटो खींच सकते हैं।
हैलेट अस्पताल में हो रही इस वसूली को उजागर कर रहे हैं यहां के कुछ मृतकों के परिजन।

 अस्पताल कर्मचारी ने मांगी कीमत 

इटावा जिले के बिधूना, औरेया निवासी बाबू राम का बीते नौ मई कोरोना से निधन हो गया। परिजनों को 10 मई की सुबह उनका शव अंतिम संस्कार के लिए कानपुर के भैरो घाट भेजा जाना था। इस दौरान परिजनों ने शव के अंतिम दर्शन की गुहार लगाई, तब एक कर्मचारी ने परेशान न हों सब करा देंगे। जरूरत पड़ी तो चार कंधे भी देंगे लेकिन कुछ कीमत चुकानी पड़ेगी। उसने कहा यहां शव उठाने वाले लड़कों को पैसा बहुत कम मिलता है। इस पर मृतक राम बाबू के एक रिश्तेदार ने सवाल किया कितना देना होगा तो कर्मचारी ने बताया गया कि कंधा देने वालों को 500-500 रुपये और मुंह दिखाने वाले को एक हजार रुपये देने होंगे। इसके बाद आइये नजर डालते है एक और केस पर।

परिजनों ने जताया ऐतराज

नौ मई की दोपहर से लेकर दूसरे दिन यानी 10 मई की सुबह तक हैलट के कोविड हॉस्पिटल में कुल आठ लोगों का निधन हुआ। इनमें ओम प्रकाश शुक्ला, संगीता यादव, श्याम लाल, सुमन वर्मा, रूपा भल्ला, बाबू राम व दो अन्य, सभी के शव पास में बनी कोविड मोर्चरी में रखवाए गए। सुबह 10 बजे जब इन सभी के शव अंतिम संस्कार के लिए एंबुलेंस में एक के ऊपर एक लादकर भैरो घाट भेजे गए। इस दौरान जिन मरीजों की मौत नौ मई की दोपहर को हुई थी उनके परिजन अस्पताल प्रशासन से गुहार लगते रहे कि अभी अंतिम संस्कार का समय है। एंबुलेंस की व्यवस्था करा दी जाए लेकिन उन सभी को यह कहकर टाल दिया गया कि घाट पर अभी जगह नहीं है। शव सुबह जाएंगे। इसके बाद जब दूसरे दिन मृतकों के परिजनों ने इस बात पर ऐतराज जताया कि एक साथ आठ से 10 शव एंबुलेंस में न ले जाएं। तो किसी ने उनकी नहीं सुनी।

इस बारे में अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक

डॉ. ज्योति सक्सेना ने कहा कि यह बहुत ही गलत काम है। अगर अस्पताल में ऐसा चल रहा है तो गोपनीय तौर पर पता लगाएंगे। कोई कर्मचारी ऐसा करते हुए पकड़ा गया तो तत्काल उसे नौकरी से बाहर किया जाएगा। हालांकि एक वाहन में कई शव जाने की वजह ये है कि मौतें बहुत ज्यादा हो रही हैं और एंबुलेंस कम हैं। इस वजह से सभी को समय पर पहुंचाने के लिए एक साथ भेजा जा रहा है।

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