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कोरोना मरीज का इलाज कर रहे प्राइवेट अस्पताल मरीजों के परिवार वालों से मनमानी ढंग से पैसे वसूल रहे हैं। संक्रमित मरीज की मौत हो जाने के बाद भी बाकी का पैसा चुकाने के बाद ही अस्पताल से परिजनों को शव दे रहे हैं।
मुजफ्फरनगर शहर से एक ऐसा ही मामला बुधवार को सामने आया जहां एक प्राइवेट अस्पताल ने ₹40000 के लिए एक बूढ़े कश्यप परिवार वालों को देने से मना कर दिया जब यह मामला सिविल सर्जन तक पहुंचा तो उनके मामले के बीच में बोलने के बाद ही परिजनों को शव सौंपा गया।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार को कोरोनावायरस में मरीज को प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराया गया एडमिट करने से पहले अस्पताल वालों ने उनसे 1 लाख जमा करने के लिए कहा जब परिजनों ने कहा कि अभी हमारे पास ₹1,00,000 नहीं है तो अस्पताल वालों ने एडमिट करने से मना कर दिया। बड़ी मुश्किलों से जब ₹40000 जमा हुए तब जाकर मरीज का इलाज शुरू हुआ।

दिन बाद हुई वृद्ध की मौत
अस्पताल में इलाज के दौरान बुजुर्ग की मौत हो गई अस्पताल संचालक ने कोविड-19 मौत होने की बात कहते हुए 40000 रुपए की मांग की परिजनों ने जब रुपए देने से इंकार कर दिया तो अस्पताल वालों ने भी शव नहीं दिया। परिजनों ने जब अस्पताल संचालक से कोरोनावायरस ने से मौत होने की रिपोर्ट मांगी तो, अस्पताल प्रबंधक ने इसको देने से मना कर दिया इस पर परिजन के किसी रिश्तेदार ने सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी को इस बात की जानकारी दी, तो सिविल सर्जन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हॉस्पिटल हेड से बात की और बिना शर्त के शव देने का निर्देश दिया तब जाकर अस्पताल प्रबंधक ने शव परिजनों को सौंपा।

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