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वहीं, किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उधर, सरकार इस मसले का समाधान तलाशने की दिशा में जुटी है। इस दिशा में तरह-तरह के कदम बढाए जा रहे हैं। इस बीच अब  केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को सुझाव देते हुए कहा कि वे आंदोलन की राह छोड़े और वार्ता की राह पकड़ें। वार्ता के जरिए इस मसले का समाधान तलाशा जा सकता है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने 20 पन्नों का सुझाव किसानों के समक्ष भेजा है। कृषि मंत्री ने अपने प्रस्ताव में कहा कि किसानों को आृंदोलन का रास्ता छोड़कर वार्ता का रास्ता अपनाना चाहिए। सरकार किसानों से बात करने को तौयार है। हम किसानों की हर समस्याओं का निदान करेंगे। बता दें कि अभी तक की किसानों और सरकार के बीच हुई सारी वार्ता बेनतीजा ही साबित हुई है।

किसानों के जीवन में आएंगे बदलाव
जहां एक तरफ किसान इस कानून का विरोध कर रहे हैं तो वहीं सरकार का पक्ष रखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह कानून किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का काम करेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि कानूनों में प्रावधान किया गया है कि किसानों को अधिक लाभ मिल सके ताकि वे अच्छी जिंदगी गुजारने का  माद्दा अपने अंदर ऱख सके। उन्होंने कहा कि किसानों को हमने प्रस्ताव भेजा है, ताकि  वे गतिरोध तोड़कर वार्ता के लिए तैयार हो सके।

हमें नहीं मिला कोई  जवाब 
कृषि मंत्री ने कहा कि हमने किसानों के पास प्रस्ताव भेजा है, मगर अभी तक हमें उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। इतना ही नहीं, हमें मीडिया से यह भी पता चला है कि उन्होंने हमारे प्रस्ताव को खारिज कर दिया है , लेकिन सरकार किसानों की समस्याओं के दृष्टिगत समस्याओं का निदान करने हेतु तैयार है।

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